इस छोटी दिवाली, अपनी जिंदगी से डर और नेगेटिविटी को कहें अलविदा…
This Choti Diwali, say goodbye to fear and negativity from your life...

Breaking Today, Digital Desk : नरक चतुर्दशी, जिसे ‘छोटी दिवाली’ के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का दूसरा दिन है। यह दिन कई मायनों में खास है, क्योंकि यह बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। आइए जानते हैं नरक चतुर्दशी के महत्व, इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं और इसे मनाने के तरीकों के बारे में।
नरक चतुर्दशी 2025 कब है?
साल 2025 में नरक चतुर्दशी [तिथि यहाँ डालें, जैसे 25 अक्टूबर 2025] को मनाई जाएगी। यह दिवाली से ठीक एक दिन पहले आती है।
नरक चतुर्दशी का महत्व: क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली?
नरक चतुर्दशी का मुख्य महत्व भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर नामक राक्षस का वध करने से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, नरकासुर ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए देवी-देवताओं और सोलह हजार कन्याओं को बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की।
भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई और कन्याओं को सम्मान दिलाया। इस जीत के उपलक्ष्य में, नरक चतुर्दशी का दिन बुराई के अंत और नई शुरुआत का प्रतीक बन गया। इस दिन लोग अपने घरों से नकारात्मक ऊर्जा और बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेते हैं।
यमराज की पूजा का विधान
नरक चतुर्दशी पर यमराज, यानी मृत्यु के देवता की पूजा का भी विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। शाम के समय घर के बाहर तेल का दीपक जलाया जाता है, जिसे ‘यम दीपक’ कहते हैं। यह दीपक यमराज को समर्पित होता है।
अभ्यंग स्नान: स्वस्थ और सुंदर त्वचा का रहस्य
इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। अभ्यंग स्नान में तिल के तेल से मालिश कर सुगंधित उबटन और जल से स्नान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्नान से व्यक्ति नरक के भय से मुक्त होता है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह स्नान त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह त्वचा को नमी प्रदान करता है और उसे चमकदार बनाता है।
छोटी दिवाली पर करें ये काम:
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दीप जलाएं: अपने घर को दीयों और मोमबत्तियों से रोशन करें। यह अंधकार को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का प्रतीक है।
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साफ-सफाई करें: नरक चतुर्दशी से पहले घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें। यह नकारात्मकता को दूर करने और धन की देवी लक्ष्मी का स्वागत करने का प्रतीक है।
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यम दीपक जलाएं: शाम को घर के बाहर यम दीपक जरूर जलाएं।
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अभ्यंग स्नान करें: सुबह सूर्योदय से पहले तिल के तेल से मालिश कर स्नान करें।
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भगवान कृष्ण की पूजा करें: भगवान कृष्ण की पूजा करें और उनके शौर्य को याद करें।
नरक चतुर्दशी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि यह हमें यह सिखाता है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और अच्छाई की ही जीत होती है। यह दिन हमें अपने अंदर की बुराइयों को त्यागकर एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।






