
Breaking Today, Digital Desk : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की हालिया दिल्ली यात्रा ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। सात दिनों में यह उनकी दूसरी दिल्ली यात्रा है, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की। आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, जिसमें आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में महायुति गठबंधन (भाजपा, शिवसेना और एनसीपी) के मिलकर चुनाव लड़ने पर चर्चा हुई।
सूत्रों का कहना है कि शिंदे अपनी पार्टी के मंत्रियों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर खुश नहीं हैं। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा लिए गए कुछ फैसलों से शिंदे और उनके मंत्री असहज महसूस कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान शिंदे ने इस बात पर जोर दिया कि शिवसेना को एनडीए के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक के रूप में सम्मान मिलना चाहिए और सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए।
शिंदे ने इन अटकलों को खारिज कर दिया है कि उनकी दिल्ली यात्रा का मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ किसी भी तरह के मतभेद से कोई लेना-देना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके बीच कोई तनाव नहीं है और वे राज्य के विकास के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। शिंदे के साथ उनके सांसद भी थे, जिन्होंने अमित शाह को सबसे लंबे समय तक गृह मंत्री रहने के लिए बधाई दी।
यह बैठक आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) सहित अन्य निकाय चुनावों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महायुति गठबंधन इन चुनावों को एक साथ लड़ने की तैयारी में है। शिंदे ने विश्वास जताया है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों की तरह ही, वे स्थानीय निकाय चुनावों में भी जीत हासिल करेंगे। इसके अलावा, शिंदे ने 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए को अपनी पार्टी के “बिना शर्त समर्थन” की भी घोषणा की।
शिंदे की इस यात्रा और शीर्ष भाजपा नेताओं के साथ उनकी बैठकों को राजनीतिक विश्लेषक कई नजरियों से देख रहे हैं। एक ओर जहां इसे चुनावी रणनीति के तहत एक सामान्य प्रक्रिया माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे शिंदे द्वारा गठबंधन के भीतर अपनी और अपनी पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के एक प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।






