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दशहरा 2025, भारत के सबसे रंगीन दशहरा उत्सव, जहां हर कोने में है एक नई कहानी…

Dussehra 2025, India's most colourful Dussehra celebration, where every corner has a new story to tell...

Breaking Today, Digital Desk : दशहरा, जिसे विजयदशमी भी कहते हैं, पूरे भारत में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया जाने वाला त्योहार है. यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जब भगवान राम ने रावण का वध किया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के अलग-अलग शहरों में इसे मनाने का तरीका कितना अनोखा और रंगीन है? चलिए, आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे शहरों की सैर पर ले चलते हैं, जहां दशहरा की रौनक देखने लायक होती है.

1. कुल्लू, हिमाचल प्रदेश: देवताओं का संगम

अगर आप सोच रहे हैं कि दशहरा सिर्फ रावण दहन का त्योहार है, तो कुल्लू का दशहरा देखकर आपकी सोच बदल जाएगी. यहां का दशहरा ‘अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा’ के नाम से जाना जाता है और इसकी शुरुआत दशहरे के दिन से होती है और यह पूरे सात दिनों तक चलता है. इस दौरान घाटी के सैकड़ों देवी-देवताओं को रंग-बिरंगी पालकियों में बिठाकर रघुनाथ जी के मंदिर ले जाया जाता है. यह नज़ारा इतना भव्य होता है कि मानो सभी देवता एक साथ मिलकर उत्सव मना रहे हों. रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जलाने की बजाय, यहां ‘लंका दहन’ का आयोजन होता है, जिसमें एक घास और लकड़ी के ढेर को जलाया जाता है, जो बुराई के अंत का प्रतीक है.

2. मैसूर, कर्नाटक: शाही अंदाज़ का दशहरा

मैसूर का दशहरा अपनी शाही शानो-शौकत के लिए मशहूर है. इसे ‘नाद हब्बा’ यानी राज्योत्सव के रूप में मनाया जाता है. यहां दशहरा सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि पूरे दस दिनों का उत्सव होता है. चामुंडी पहाड़ी पर स्थित चामुंडेश्वरी देवी के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ इसकी शुरुआत होती है. मैसूर पैलेस को लाखों बल्बों से सजाया जाता है, जिसकी जगमगाहट दूर से ही देखने लायक होती है. दशहरे के आखिरी दिन, एक भव्य जुलूस निकलता है जिसे ‘जंबो सवारी’ कहते हैं. इसमें सजे-धजे हाथियों पर चामुंडेश्वरी देवी की मूर्ति को बैठाकर पूरे शहर में घुमाया जाता है. यह जुलूस मैसूर की समृद्ध संस्कृति और विरासत का प्रतीक है.

3. कोलकाता, पश्चिम बंगाल: दुर्गा पूजा का भव्य समापन

कोलकाता में दशहरा दुर्गा पूजा के भव्य समापन के रूप में मनाया जाता है. हालांकि, यहां रावण दहन नहीं होता, बल्कि देवी दुर्गा की विदाई का उत्सव होता है. विजयादशमी के दिन महिलाएं सिंदूर खेला करती हैं, जिसमें वे एक-दूसरे को और देवी को सिंदूर लगाती हैं, जो सौभाग्य और खुशी का प्रतीक है. इसके बाद, देवी दुर्गा की मूर्तियों को बड़े उत्साह और ढोल-नगाड़ों के साथ विसर्जन के लिए ले जाया जाता है. गंगा नदी में मूर्तियों का विसर्जन होता है, और यह नज़ारा भक्ति और थोड़ी उदासी से भरा होता है, क्योंकि भक्त अगले साल देवी के वापस आने का इंतज़ार करते हैं.

4. वाराणसी, उत्तर प्रदेश: रामलीला का जीवंत मंचन

वाराणसी में दशहरा रामलीला के भव्य मंचन के लिए जाना जाता है. यहां कई जगहों पर रामलीला का मंचन कई दिनों पहले से ही शुरू हो जाता है, जिसमें कलाकार भगवान राम के जीवन की घटनाओं को जीवंत रूप से प्रस्तुत करते हैं. दशहरे के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशाल पुतले जलाए जाते हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. यहां की रामलीलाएं इतनी पुरानी और पारंपरिक हैं कि इन्हें देखना एक अनोखा अनुभव होता है.

5. दिल्ली: आधुनिक और पारंपरिक दशहरा का मेल

दिल्ली में दशहरा पूरे देश के लोगों द्वारा मनाया जाता है, जिससे यह त्योहार एक विविध रूप ले लेता है. यहां कई जगहों पर बड़े-बड़े मैदानों में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जलाए जाते हैं. रामलीला का मंचन भी कई दिनों तक चलता है, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है. दिल्ली का दशहरा आधुनिकता और परंपरा का एक खूबसूरत मिश्रण है, जहां नए ज़माने के तौर-तरीकों के साथ पुराने रीति-रिवाजों को भी बखूबी निभाया जाता है.

भारत में हर शहर की अपनी एक अलग पहचान है और दशहरा मनाने का अपना ही अंदाज़. यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि चाहे कितनी भी बुराई क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सच्चाई और अच्छाई की ही होती है. तो, अगले दशहरा 2025 में आप इनमें से कौन से शहर में उत्सव का हिस्सा बनना चाहेंगे?

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