
Breaking Today, Digital Desk : यह घटना 1969 की है, जब भारतीय सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री रेखा महज 15 साल की थीं और अपनी पहली फिल्म ‘अंजाना सफर’ के सेट पर कदम रखा था। उस दौर में वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कार्यशैली से पूरी तरह अनजान थीं। उस दिन एक रोमांटिक सीन फिल्माया जाना था, लेकिन रेखा को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ पल उनके जीवन में एक दर्दनाक याद बनकर रह जाएँगे।
फिल्म के निर्देशक कुलजीत पाल और अभिनेता बिस्वजीत ने रेखा को बताए बिना एक किसिंग सीन की योजना बनाई थी। जैसे ही डायरेक्टर ने ‘एक्शन’ कहा, 32 वर्षीय बिस्वजीत ने रेखा को अपनी बाहों में भर लिया और उन्हें चूमने लगे। रेखा इस अप्रत्याशित घटना से स्तब्ध और हैरान रह गईं। उन्हें इस सीन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
कैमरा चलता रहा, लेकिन न तो निर्देशक ने ‘कट’ कहा और न ही बिस्वजीत रुके। यह सिलसिला करीब पांच मिनट तक चलता रहा, जबकि सेट पर मौजूद अन्य सदस्य तालियाँ और सीटियाँ बजाते रहे। असहाय रेखा की आँखें बंद थीं, लेकिन उनसे आँसू बह रहे थे। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया और वह बेहद अपमानित और आहत महसूस कर रही थीं।
इस भयावह घटना का विस्तृत उल्लेख यासिर उस्मान द्वारा लिखित रेखा की जीवनी ‘रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी’ में किया गया है। सालों बाद जब इस विवाद के बारे में बिस्वजीत से पूछा गया, तो उन्होंने इसे निर्देशक का विचार बताते हुए बचाव किया और कहा कि यह सीन फिल्म के लिए जरूरी था। हालांकि, यह घटना बॉलीवुड के उस स्याह पक्ष को उजागर करती है, जहाँ महिला कलाकारों को, विशेष रूप से नई अभिनेत्रियों को, अक्सर ऐसी शोषणकारी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था।
फिल्म ‘अंजाना सफर’ सेंसरशिप की वजह से लगभग दस साल तक रुकी रही और बाद में 1979 में ‘दो शिकारी’ नाम से रिलीज हुई। लेकिन यह घटना रेखा के जीवन में एक कड़वी याद और फिल्म उद्योग में महिलाओं के संघर्ष के एक प्रतीक के रूप में हमेशा के लिए दर्ज हो गई।






