
Breaking Today, Digital Desk : हाल के शोध और आँकड़ों से पता चला है कि भारतीय महिलाओं में कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर (early-onset breast cancer) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यह चिंता का विषय है क्योंकि पारंपरिक रूप से इसे अधिक उम्र की बीमारी माना जाता रहा है। आखिर क्या कारण है कि अब कम उम्र की महिलाएँ भी इसकी चपेट में आ रही हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे के कुछ मुख्य कारण।
बदलती जीवनशैली और खान-पान
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी जीवनशैली में काफी बदलाव आया है। अनियमित खान-पान, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन एक बड़ा कारण हो सकता है। इन चीज़ों में अक्सर ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर में सूजन और हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं, जो कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, व्यायाम की कमी और गतिहीन जीवनशैली भी मोटापे (obesity) को बढ़ावा देती है, जो ब्रेस्ट कैंसर के लिए एक ज्ञात जोखिम कारक है।
पर्यावरणीय कारक और प्रदूषण
हम जिस वातावरण में रहते हैं, उसका भी हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। वायु प्रदूषण, कीटनाशकों का उपयोग और प्लास्टिक उत्पादों में पाए जाने वाले रसायन (endocrine disruptors) शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं। ये रसायन एस्ट्रोजन के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
आनुवंशिक प्रवृति और पारिवारिक इतिहास
कुछ मामलों में, आनुवंशिक कारक (genetic predisposition) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि परिवार में किसी को पहले ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, खासकर माँ या बहन को, तो अन्य सदस्यों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में उत्परिवर्तन (mutations) ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को काफी बढ़ा सकते हैं। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसी को कैंसर होगा, लेकिन नियमित जाँच और सतर्कता ज़रूरी है।
देरी से मातृत्व और स्तनपान में कमी
आधुनिक जीवनशैली में महिलाएँ अब देर से माँ बन रही हैं, या कई बार माँ बनने से बच रही हैं। शोध बताते हैं कि जिन महिलाओं ने कभी बच्चे को जन्म नहीं दिया है, या जिन्होंने 30 साल की उम्र के बाद पहला बच्चा पैदा किया है, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ जाता है। इसके अलावा, स्तनपान (breastfeeding) को ब्रेस्ट कैंसर से बचाव में सहायक माना जाता है। स्तनपान न कराने या कम समय तक कराने से भी जोखिम बढ़ सकता है।
तनाव और मानसिक स्वास्थ्य
आजकल की जीवनशैली में तनाव (stress) एक आम समस्या बन गया है। लगातार उच्च स्तर का तनाव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है और कोशिकाओं में असामान्यताएँ पैदा कर सकता है। हालाँकि तनाव सीधे तौर पर कैंसर का कारण नहीं बनता, लेकिन यह शरीर को बीमारी से लड़ने में कमज़ोर कर सकता है।
जागरूकता और नियमित जाँच की आवश्यकता
इन सभी कारकों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि भारतीय महिलाओं में अर्ली-ऑनसेट ब्रेस्ट कैंसर का उदय एक जटिल समस्या है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं को अपने शरीर के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी असामान्य बदलाव को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। नियमित सेल्फ-चेकअप और डॉक्टर से परामर्श ज़रूरी है। मैमोग्राफी (mammography) जैसी स्क्रीनिंग विधियाँ शुरुआती चरण में कैंसर का पता लगाने में मदद कर सकती हैं, जिससे सफल उपचार की संभावना बढ़ जाती है।
आइए, इन बदलती परिस्थितियों को समझें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस चुनौती का सामना करें।






