
Breaking Today, Digital Desk : व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें यूरोप के कई बड़े नेता भी शामिल हुए. इस मुलाक़ात का माहौल पिछली बैठकों से कहीं ज़्यादा गर्मजोशी भरा था और इसे यूक्रेन संकट के समाधान की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. इस बैठक के बाद ये सवाल उठ रहा है कि क्या ये यूक्रेन के लिए एक नई सुबह की शुरुआत है?
इस अहम बैठक में ज़ेलेंस्की अकेले नहीं थे, बल्कि उनके साथ फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों के शीर्ष नेता भी मौजूद थे. यह पश्चिमी देशों की एकजुटता का एक बड़ा प्रतीक था, जिसका मकसद रूस को एक कड़ा संदेश देना था.
बातचीत के मुख्य बिंदु:
सुरक्षा की गारंटी: बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा यूक्रेन को भविष्य में सुरक्षा की गारंटी देना था. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका, यूक्रेन की सुरक्षा में मदद करेगा, हालांकि उन्होंने यह भी साफ़ किया कि यूरोप को रक्षा की पहली दीवार बनना होगा. ज़ेलेंस्की ने इसे एक बड़ी सफलता बताया.
पुतिन के साथ मुलाक़ात की पेशकश: ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वो जल्द ही ज़ेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक कराने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा कि पुतिन से उनकी बात हुई है और वह ज़ेलेंस्की से मिलने को तैयार हैं.
संघर्ष विराम पर बदली राय: पहले संघर्ष विराम को प्राथमिकता देने वाले ट्रंप ने इस बैठक में कहा कि शांति समझौते के लिए इसकी तत्काल ज़रूरत नहीं है. यह पुतिन के उस रुख से मिलता-जुलता है, जिसमें पहले एक व्यापक समझौते पर ज़ोर दिया गया है.
इलाकों की अदला-बदली पर चर्चा: बातचीत में कुछ इलाकों की अदला-बदली की संभावना पर भी चर्चा हुई, जो कि एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है.
हथियारों की खरीद: ज़ेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन ने अमेरिका से लगभग 90 अरब डॉलर के हथियार खरीदने की पेशकश की है, जिसमें हवाई रक्षा प्रणाली और लड़ाकू विमान शामिल हैं.
इस मुलाक़ात को कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी हलचल माना जा रहा है. जहां एक तरफ़ ज़ेलेंस्की को पश्चिमी देशों का मज़बूत समर्थन मिला है, वहीं ट्रंप ने पुतिन के साथ बातचीत का रास्ता खोलकर एक नई उम्मीद जगाई है. हालांकि, आगे की राह आसान नहीं है, लेकिन इस बैठक ने शांति की दिशा में कुछ नए दरवाज़े ज़रूर खोले हैं.




