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ओवैसी ने तीन सरकारी विधेयकों के खिलाफ खोला मोर्चा, पुलिस राज का खतरा बताया..

Owaisi opened front against three government bills, called it a threat of police rule

Breaking Today, Digital Desk : संसद के मानसून सत्र में सरकार द्वारा पेश किए गए तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर सियासत गरमा गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इन विधेयकों, जिनमें एक संविधान संशोधन विधेयक भी शामिल है, को लेकर तीखी आपत्ति जताई है। उन्होंने इन प्रस्तावित कानूनों को “असंवैधानिक” करार देते हुए आरोप लगाया कि यह देश को “पुलिस स्टेट” में बदलने की एक कोशिश है और इससे प्रभावी शासन के लिए एक गंभीर खतरा पैदा होगा।

क्या हैं सरकार के तीन नए विधेयक?

केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए हैं:

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025: इसके तहत गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिनों से अधिक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है।

केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025

इन तीनों विधेयकों को संसदीय समिति के पास भेजा जा सकता है।

ओवैसी ने क्यों जताया विरोध?

असदुद्दीन ओवैसी ने इन विधेयकों का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि ये कानून शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत (separation of powers) का सीधा उल्लंघन हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह संशोधन जांच एजेंसियों को खुली छूट दे देगा, जिससे वे “जज, जूरी और जल्लाद” की भूमिका में आ जाएंगी।

ओवैसी ने तर्क दिया कि किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री को हटाने का अधिकार केवल विधानसभा के पास होना चाहिए, न कि जांच एजेंसियों के पास। उन्होंने कहा, “महज एक आरोप या संदेह के आधार पर किसी भी एजेंसी को मंत्री या मुख्यमंत्री को हिरासत में लेने की अनुमति मिल जाएगी।” उनका मानना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करेगा, जहां जनता चुनी हुई सरकारों को जवाबदेह ठहराती है। ओवैसी ने इसे जर्मनी के “1930 के गेस्टापो मूवमेंट” से जोड़ते हुए कहा कि यह देश में एक पुलिस राज स्थापित करने जैसा है, जहां मुख्यमंत्री जनता के बजाय जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेह हो जाएंगे।

उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। भाजपा सरकार हर चीज को अपने हाथ में केंद्रित कर रही है, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता हमेशा नहीं रहती।”

विपक्ष के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

सिर्फ ओवैसी ही नहीं, बल्कि विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इन विधेयकों की तीखी आलोचना की है। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने संविधान संशोधन विधेयक को “कठोर” बताते हुए केंद्र सरकार पर सत्तावादी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि इस कानून का इस्तेमाल किसी भी मुख्यमंत्री को बिना दोषसिद्धि के पद से हटाने के लिए किया जा सकता है। विपक्ष के एक सांसद ने तो यहां तक कह दिया है कि इस बिल को पेश ही नहीं होने दिया जाएगा, चाहे इसके लिए टेबल तोड़नी पड़े या बिल फाड़ना पड़े।

विपक्ष का आरोप है कि इन कानूनों का असली मकसद सीबीआई-ईडी जैसी एजेंसियों का उपयोग करके विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य सरकारों को अस्थिर करना और गिराना है। इन विधेयकों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नए टकराव को जन्म दे दिया है, जिससे संसद के मानसून सत्र में हंगामा और बढ़ने की आशंका है

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