
Breaking Today, Digital Desk : केरल सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि क्या स्कूलों की वार्षिक छुट्टियों को अप्रैल-मई के गर्म महीनों से हटाकर जून-जुलाई के मानसून सीजन में कर दिया जाना चाहिए। राज्य के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक बहस की शुरुआत की है, ताकि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सुझाव मांगे जा सकें।
यह प्रस्ताव दोहरी चुनौतियों का समाधान करने के प्रयास में सामने आया है। वर्तमान में, केरल में अप्रैल और मई के महीनों में गर्मी की छुट्टियां होती हैं, जब तापमान अक्सर बहुत अधिक होता है, जिससे बच्चों के लिए बाहरी गतिविधियाँ असुविधाजनक और असुरक्षित हो जाती हैं। वहीं दूसरी ओर, जून में जब स्कूल दोबारा खुलते हैं, तो दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के कारण भारी बारिश होती है। इसके चलते अक्सर कक्षाओं को रद्द करना पड़ता है, जिससे पढ़ाई का नुकसान होता है।
शिक्षा मंत्री ने इस बदलाव के संभावित फायदे और नुकसान पर जनता से राय मांगी है। उन्होंने यह भी पूछा है कि इस तरह के बदलाव का छात्रों के स्वास्थ्य और उनकी पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा और यह शिक्षकों तथा अभिभावकों के लिए कितना व्यावहारिक होगा। कुछ लोगों ने मई-जून को छुट्टियों के लिए एक वैकल्पिक समय के रूप में भी सुझाया है।
मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से इस चर्चा की शुरुआत की और लोगों से इस विषय पर अपने विचार और सिफारिशें साझा करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि इस पहल से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर एक रचनात्मक बातचीत का मार्ग प्रशस्त होगा। हालांकि, इस बदलाव को लागू करना आसान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए केरल शिक्षा नियमों (KER) में संशोधन की आवश्यकता होगी और शिक्षक संगठनों के साथ-साथ अभिभावक-शिक्षक संघों के साथ भी बातचीत करनी होगी
यह प्रस्ताव शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा बार-बार जताई गई उस चिंता को भी दर्शाता है जिसमें मानसून के कारण जून में स्कूल खुलने के चरण में पढ़ाई के दिनों का भारी नुकसान होता है। मंत्री ने कहा कि अक्सर खराब मौसम और बाढ़ के खतरे के कारण जून-जुलाई में स्कूल भवनों को राहत शिविरों के लिए इस्तेमाल करना पड़ता है। साथ ही, भारी बारिश के दिनों में माता-पिता को बच्चों को स्कूल छोड़ने और वापस लाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और बच्चों में बरसात से संबंधित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।




