
Breaking Today, Digital Desk : आजकल हम सब डिजिटल दुनिया में इतना खो गए हैं कि हमें पता ही नहीं चलता कि हमारे फ़ोन और दूसरे डिवाइस हमारी सेहत और दिमाग़ पर कितना गहरा असर डाल रहे हैं। हम सोचते हैं कि ये सिर्फ़ हमारा मनोरंजन कर रहे हैं या हमारा काम आसान कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और है।
जब हम लगातार इन स्क्रीन्स पर देखते रहते हैं, तो हमारी आँखें थक जाती हैं। कई बार तो आँखों में जलन होने लगती है, धुंधला दिखने लगता है और सिरदर्द भी शुरू हो जाता है। रात को जब हम देर तक फ़ोन इस्तेमाल करते हैं, तो ब्लू लाइट की वजह से हमारी नींद ख़राब होती है। हमें लगता है कि हम सो रहे हैं, लेकिन दिमाग़ पूरी तरह से शांत नहीं हो पाता।
इसके अलावा, इन डिवाइसों की वजह से हमारा शरीर भी अकड़ जाता है। घंटों तक एक ही पोस्चर में बैठे रहने से गर्दन, पीठ और कंधों में दर्द होने लगता है। आप ख़ुद सोचिए, कितनी बार आप अपने फ़ोन में इतना खो जाते हैं कि आपको समय का पता ही नहीं चलता?
मानसिक तौर पर भी ये डिवाइस हमें बहुत प्रभावित करते हैं। लगातार सोशल मीडिया पर दूसरों की ज़िंदगी देखकर हमें हीन भावना आ सकती है। हमें लगता है कि दूसरे हमसे ज़्यादा ख़ुश हैं या उनकी ज़िंदगी ज़्यादा अच्छी है। इससे तनाव और चिंता बढ़ सकती है।
डिजिटल डिटॉक्स का मतलब ये नहीं कि आप पूरी तरह से डिवाइस छोड़ दें, बल्कि इसका मतलब है कि आप उनका समझदारी से इस्तेमाल करें। अपने लिए कुछ नियम बनाएँ। जैसे, रात को सोने से एक घंटा पहले फ़ोन को दूर रख दें। खाना खाते समय या परिवार के साथ बैठते समय फ़ोन इस्तेमाल न करें। बीच-बीच में स्क्रीन से ब्रेक लें और बाहर जाकर टहलें या कोई और काम करें जिसमें स्क्रीन का इस्तेमाल न हो।
जब आप ऐसा करेंगे, तो आपको ख़ुद फ़र्क़ महसूस होगा। आपकी आँखें बेहतर महसूस करेंगी, नींद अच्छी आएगी और आप मानसिक तौर पर भी ज़्यादा शांत और ख़ुश महसूस करेंगे। अपनी सेहत और दिमाग़ को इस डिजिटल शोर से बचाने का समय आ गया है।






