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देवेगौड़ा की राजनीतिक विरासत पर लगा ग्रहण…

Deve Gowda's political legacy eclipsed

Breaking Today, Digital Desk : पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद, उनके दादा और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा की छह दशकों की राजनीतिक विरासत पर एक अमिट धब्बा लग गया है। यह मामला न केवल एक राजनीतिक हस्ती के पतन का प्रतीक है, बल्कि इसने देवेगौड़ा परिवार और उनकी पार्टी, जनता दल (सेक्युलर) के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रज्वल रेवन्ना, जो कभी अपने दादा के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाते थे, को एक विशेष अदालत ने अपनी घरेलू सहायिका के साथ बार-बार बलात्कार करने का दोषी पाया।अदालत ने रेवन्ना को “ताउम्र” कैद की सजा सुनाई, जिसका अर्थ है कि उन्हें अपने शेष जीवन के लिए जेल में रहना होगा। उन पर यौन उत्पीड़न, ताक-झांक, आपराधिक धमकी और सबूतों से छेड़छाड़ सहित कई अन्य आरोपों में भी दोषी ठहराया गया। यह मामला तब सामने आया जब प्रज्वल से जुड़े कई आपत्तिजनक वीडियो क्लिप सार्वजनिक हो गए, जिससे देश भर में आक्रोश फैल गया।

एच.डी. देवेगौड़ा ने 1953 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और 1996 में भारत के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 1999 में जनता दल (सेक्युलर) की स्थापना की, जिसका मुख्य आधार कर्नाटक में रहा है। अपनी साधारण पृष्ठभूमि और किसानों के नेता के रूप में अपनी छवि के लिए जाने जाने वाले देवेगौड़ा ने एक लंबी और सम्मानजनक राजनीतिक पारी खेली।

हालांकि, उनके अपने पोते से जुड़े इस वीभत्स कांड ने उनकी सारी जिंदगी की कमाई हुई इज्जत को धूमिल कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकरण से जद(एस) पार्टी को गहरा धक्का लगा है, जो पहले से ही अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही थी। इस घटना ने न केवल देवेगौड़ा परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल भी तोड़ा है। कभी कर्नाटक की राजनीति में एक मजबूत ताकत मानी जाने वाली जद(एस) के लिए इस संकट से उबरना एक बड़ी चुनौती होगी।

प्रज्वल रेवन्ना का मामला भारतीय राजनीति में परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग का एक और दुखद उदाहरण है। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि कानून के सामने कोई भी बड़ा नहीं होता। भले ही प्रज्वल ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया और इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया, लेकिन अदालत ने सबूतों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया। इस फैसले ने निश्चित रूप से देवेगौड़ा की विरासत पर एक ऐसा दाग लगा दिया है, जिसे मिटाना शायद मुश्किल होगा।

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