
Breaking Today, Digital Desk : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार और लंबा हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अब सितंबर में होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद ही नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान करेगी। पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि 15 अगस्त के बाद पार्टी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव की घोषणा ने इस प्रक्रिया को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है
मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल इस साल के लोकसभा चुनाव के बाद ही समाप्त हो गया था, लेकिन उन्हें विस्तार दिया गया था।] पार्टी के नए अध्यक्ष को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि, पार्टी के भीतर उम्मीद थी कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नए अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाएगी।
कई राज्यों में सांगठनिक चुनाव और आम सहमति का अभाव बनी वजह
अध्यक्ष के चुनाव में हो रही इस देरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। कई महत्वपूर्ण राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा में अभी तक पार्टी के आंतरिक सांगठनिक चुनाव पूरे नहीं हुए हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है, जब कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों में संगठन के चुनाव संपन्न हो गए हों।
इसके अलावा, नए अध्यक्ष के नाम पर आम सहमति नहीं बन पाना भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच भी उम्मीदवार को लेकर मंथन चल रहा है, ताकि एक ऐसा चेहरा सामने लाया जा सके जो संगठन में अनुभवी हो और सबको साथ लेकर चल सके।
कौन हैं अध्यक्ष पद की दौड़ में?
अध्यक्ष पद के लिए कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान और शिवराज सिंह चौहान के नाम प्रमुख हैं। इनके अलावा, कुछ महिला नेताओं के नाम पर भी विचार किए जाने की खबरें हैं, जिनमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, डी. पुरंदेश्वरी और वनथी श्रीनिवासन शामिल हैं।
भाजपा के लिए यह चुनाव काफी अहम है क्योंकि नया अध्यक्ष न केवल पार्टी को चलाएगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति को भी दिशा देगा। फिलहाल, सभी की निगाहें उपराष्ट्रपति चुनाव पर टिकी हैं और उसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि भाजपा का अगला कप्तान कौन होगा।






