
Breaking Today, Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ के खिलाफ वैश्विक मंच पर एक नई रणनीति बनती दिख रही है. ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने इस मामले पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की है और जल्द ही वे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी संपर्क साधने की योजना बना रहे हैं. इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) को एकजुट कर ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ एक समन्वित प्रतिक्रिया तैयार करना है.
यह पूरा मामला तब गरमाया जब ट्रंप ने ब्राजील से आयात होने वाली वस्तुओं पर 50% का टैरिफ लगा दिया. इस कदम को लेकर लूला ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास का “सबसे दुर्भाग्यपूर्ण” समय है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे पर ट्रंप से कोई बातचीत नहीं करेंगे क्योंकि अमेरिकी नेता “बात नहीं करना चाहते”. इसके बजाय, लूला ने अपने ब्रिक्स सहयोगियों के साथ मिलकर इस चुनौती का सामना करने का फैसला किया है.
लूला ने कहा, “मैं शी जिनपिंग को फोन करूंगा, मैं प्रधानमंत्री मोदी को फोन करूंगा. मैं पुतिन को फोन नहीं करूंगा, क्योंकि वह अभी यात्रा नहीं कर सकते. लेकिन मैं कई राष्ट्रपतियों को फोन करूंगा.” उनका मानना है कि एकतरफा बातचीत के बजाय बहुपक्षीय संस्थानों के भीतर सामूहिक रूप से निर्णय लिए जाने चाहिए.
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स देश मिलकर दुनिया की एक बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं, और अगर वे एकजुट होकर कोई कदम उठाते हैं तो इसका वैश्विक व्यापार पर गहरा असर पड़ सकता है. रूस ने भी इस मामले में ब्रिक्स देशों के साथ खड़े होने की बात कही है. रूसी सीनेटर एलेक्सी पुष्कोव ने कहा है कि यदि एक समन्वित प्रतिक्रिया पर सहमति बनती है, तो यह ब्रिक्स और अमेरिका के बीच चल रहे छिपे हुए टकराव में एक नया मोड़ होगा.
भारत ने भी ट्रंप के टैरिफ को “अनुचित और अन्यायपूर्ण” करार दिया है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्रिक्स देश मिलकर क्या रणनीति अपनाते हैं और इस व्यापारिक तनाव का भविष्य क्या होता है.




