छठ पूजा 2025, नहाय-खाय पर क्या करें और क्या नहीं, जानिए पूरी जानकारी…
Chhath Puja 2025, Dos and Don'ts on Nahay-Khaay, Know the full details...

Breaking Today, Digital Desk : छठ पूजा, जो कि सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, एक ऐसा पर्व है जिसका इंतज़ार लोग साल भर करते हैं। ये सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है। आइए जानते हैं 2025 में नहाय-खाय का क्या महत्व है, पूजा विधि क्या है और शुभ मुहूर्त कब है।
नहाय-खाय क्या है और इसका महत्व क्या है?
छठ पूजा का पहला दिन ‘नहाय-खाय’ कहलाता है। नाम से ही स्पष्ट है – ‘नहाय’ यानी स्नान करना और ‘खाय’ यानी खाना। इस दिन व्रती (जो लोग व्रत रखते हैं) और परिवार के सदस्य सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करते हैं। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। ये सिर्फ खाना नहीं, बल्कि खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से छठ पूजा के लिए तैयार करने का पहला कदम है।
इस दिन घर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है। चूंकि छठ पूजा में शुद्धता का बहुत महत्व है, इसलिए नहाय-खाय के दिन से ही घर को पूरी तरह से स्वच्छ और पवित्र कर लिया जाता है। इस दिन कद्दू की सब्ज़ी (लौकी), दाल और चावल मुख्य रूप से खाए जाते हैं। इसमें सेंधा नमक का ही इस्तेमाल होता है। ये भोजन पूरे परिवार के साथ मिलकर प्रेम और श्रद्धा से बनाया व खाया जाता है। ये परंपरा दर्शाती है कि कैसे ये पर्व पूरे परिवार को एकजुट करता है।
छठ पूजा 2025: नहाय-खाय का शुभ मुहूर्त
(यहाँ आपको 2025 की छठ पूजा के नहाय-खाय की तिथि और शुभ मुहूर्त डालना होगा। चूंकि अभी 2025 नहीं आया है, मैं एक उदाहरण दे रहा हूँ। आपको इसे असली जानकारी से बदलना होगा।)
उदाहरण के लिए:
छठ पूजा 2025 का नहाय-खाय [तारीख] को पड़ेगा। इस दिन सूर्योदय [समय] पर होगा और सूर्यास्त [समय] पर। स्नान और भोजन के लिए सबसे अच्छा समय सुबह का ही माना जाता है, जब आप पवित्र होकर अपनी दिनचर्या शुरू करें।
नहाय-खाय की सही विधि:
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पवित्र स्नान: नहाय-खाय के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में (अगर संभव हो) या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
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घर की साफ-सफाई: पूरे घर को अच्छी तरह साफ करें। इस दिन से ही घर में लहसुन-प्याज का सेवन बंद कर दिया जाता है।
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सात्विक भोजन का निर्माण: व्रती महिलाएं और परिवार के सदस्य मिलकर कद्दू की सब्ज़ी (लौकी), चने की दाल और चावल बनाते हैं। इसमें शुद्ध घी और सेंधा नमक का ही प्रयोग होता है।
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भोजन ग्रहण: सबसे पहले व्रती इस भोजन को ग्रहण करती हैं। उसके बाद परिवार के अन्य सदस्य इस प्रसाद को खाते हैं। ध्यान रहे, इस दिन भोजन में कोई मिलावट या अपवित्रता न हो।
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पवित्रता का संकल्प: नहाय-खाय के दिन से ही मन में छठ पूजा के चारों दिनों की पवित्रता और नियमों का पालन करने का संकल्प लिया जाता है।
नहाय-खाय का दिन हमें इस बात की याद दिलाता है कि किसी भी बड़े कार्य को शुरू करने से पहले हमें तन और मन दोनों से शुद्ध होना चाहिए। ये छठ पूजा की शुरुआत है, जो हमें आगे आने वाले दिनों के लिए तैयार करती है, जहाँ हम सूर्य देव और छठी मैया से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।






