मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए’ की गूंज, कांवड़ लेकर पहुंचे सपा विधायक अतुल प्रधान…
Echo of 'We want a school, not a Madhushala', SP MLA Atul Pradhan arrived with a Kanwad

Breaking Today, Digital Desk : उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा के बाहर एक अप्रत्याशित और नाटकीय दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। समाजवादी पार्टी के मुखर विधायक अतुल प्रधान एक कांवड़ को अपने कंधे पर उठाकर विधान भवन परिसर में पहुंचे, लेकिन यह कांवड़ किसी पहुँच चुके हैं।
विधायक अतुल प्रधान का कहना है कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएँ नहीं हैं, और निजी स्कूल मनमाने ढंग से फीस वसूल रहे हैं, जिससे आम आदमी पर बोझ बढ़ रहा है। इसी मुद्दे को उजागर करने के लिए उन्होंने कांव धार्मिक यात्रा की नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर एक तीखे राजनीतिक कटाक्ष की कहानी कह रही थी।
इस अनूठे विरोध प्रदर्शन में इस्तेमाल की गई कांवड़ के एक पलड़े पर पाठशालाड़ यात्रा के पवित्र प्रतीक का उपयोग किया, जिसे आमतौर पर भगवान शिव के भक्त धार्मिक यात्रा के दौरान लेकर चलते हैं। इस प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते थे कि शिक्षा का अधिकार भी उतना ही पवित्र और आवश्यक है जितना कि धार्मिक (स्कूल) की तस्वीर थी, तो दूसरे पर मधुशाला (शराब की दुकान) का चित्र। इस आस्था।
विधानसभा परिसर में उनके इस प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींचा। जहाँ कुछ लोगों ने उनके इस कदम को नौ कांवड़ पर साफ-साफ लिखा था, “हमें चाहिए पाठशाला, नहीं चाहिए मधुशाला,” जो सरकार की नीतियोंटंकी करार दिया, वहीं कई लोगों ने उनके उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया। प्रधान ने कहा कि उनका यह विरोध पर एक सीधा और स्पष्ट संदेश था। यही नहीं, इस कांवड़ पर आधुनिक भारत के दो किसी को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि सरकार को उसकी जिम्मेदारियों का एहसास कराने के लिए है। महापुरुषों, डॉ. भीमराव आंबेडकर और डॉ. राम मनोहर लोहिया की तस्वीरें भी लगी थीं, जो इस उन्होंने कहा, “जब तक सरकार आम आदमी की समस्याओं, विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं देती, मैं विरोध को एक वैचारिक आधार प्रदान कर रही थीं।
सरधना सीट से सपा इसी तरह अलग-अलग तरीकों से विरोध करता रहूँगा।”
अतुल प्रधान इससे पहले भी महँगी शिक्षा और चिकित्सा विधायक अतुल प्रधान ने इस मौके पर सरकार की स्कूल मर्जर नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने के खिलाफ धरने पर बैठ चुके हैं। उनका मानना है कि सरकार को निजी स्कूलों और अस्पतालों की लूट कहा कि सरकार लगातार सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है, जिससे गरीब, मजदूर और छोटे व्यापारियों के बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ तो ज्ञान के मंदिर बंद हो रहे हैं, तो पर लगाम लगानी चाहिए और सरकारी संस्थानों की हालत में सुधार करना चाहिए। उनके ये विरोध प्रदर्शन अक्सर सुर्खियाँ बटोरते वहीं दूसरी ओर शराब की दुकानों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही हैं और सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का कारण बनते हैं।






