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नई कार पर क्यों बनाए जाते हैं बेटी या पत्नी के पद-चिन्ह, जानें क्या है मान्यता…

Why are the footprints of a daughter or wife made on a new car, Know the belief

Breaking Today, Digital Desk : भारत में कोई भी नया काम शुरू करने या नई वस्तु घर लाने पर पूजा-पाठ और कुछ पारंपरिक रीतियों का पालन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. यह मान्यता है कि ऐसा करने से उस वस्तु पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है. इसी तरह, नया वाहन जैसे कार या बाइक खरीदने पर भी उसकी पूजा की जाती है. इन पूजा विधियों में एक खास रिवाज है नई गाड़ी पर घर की बेटी या पत्नी के पैरों के निशान बनाना. यह प्रथा शुभ मानी जाती है, जिसके पीछे एक गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता छिपी है.

क्या है इसके पीछे का धार्मिक महत्व?

हिन्दू धर्म में घर की बेटी और पत्नी को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है. जिस तरह दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी के आगमन के प्रतीक के रूप में उनके पद-चिन्ह घर में बनाए जाते हैं, ठीक उसी तरह नई गाड़ी पर बेटी या पत्नी के पैरों के निशान बनाए जाते हैं. यह इस बात का प्रतीक है कि देवी लक्ष्मी उस वाहन में विराजमान हो गई हैं.

यह परंपरा कुछ मुख्य विश्वासों पर आधारित है:

समृद्धि और सौभाग्य का आगमन: माना जाता है कि बेटी या पत्नी के कदम लक्ष्मी के कदम होते हैं. उनके पद-चिन्हों को वाहन पर अंकित करने से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है.

नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: यह मान्यता है कि यह पवित्र चिन्ह वाहन को हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और अशुभ प्रभावों से बचाता है, जिससे यात्रा सुरक्षित रहती है.

ईश्वरीय आशीर्वाद: यह ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने का भी एक तरीका है. वाहन पर बेटी के पैरों के निशान बनाकर मालिक ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उनकी कृपा हमेशा बनी रहे और वाहन से कोई अनहोनी न हो.

अक्सर कुमकुम या रोली में पैर डुबोकर गाड़ी के बोनट या डैशबोर्ड पर बेटी या पत्नी के छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं. यह दृश्य न केवल भावनात्मक रूप से सुखद होता है, बल्कि परिवार के लिए एक शुभ शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है. यह परंपरा दर्शाती है कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को कितना सम्मानजनक और पूजनीय स्थान दिया गया है.

इसलिए, नई गाड़ी पर अपनी बेटी या पत्नी के पैरों के निशान बनाना अशुभ नहीं, बल्कि अत्यंत शुभ माना जाता है. यह एक सुंदर रिवाज है जो ईश्वर के आशीर्वाद और घर की लक्ष्मी के सम्मान के साथ एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है.

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