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ऊँची वादियों में सेहत का रखें ख्याल, जानिए डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सलाह…

Take care of your health in high valleys, know important advice from doctors...

Breaking Today, Digital Desk : पहाड़ों की मनमोहक सुंदरता और रोमांचक अनुभव हर किसी को अपनी ओर खींचते हैं. लेकिन इन ऊँची और खूबसूरत वादियों की यात्रा की तैयारी करते समय सेहत का ध्यान रखना सबसे ज़रूरी है. पहाड़ों पर कम ऑक्सीजन और बदलते मौसम के कारण शरीर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए, एक सुरक्षित और यादगार यात्रा के लिए डॉक्टरों द्वारा दी गई सलाह का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है.

यात्रा से पहले की तैयारी

पहाड़ी इलाकों की यात्रा की योजना बनाने से पहले एक बार डॉक्टर से परामर्श करना एक समझदारी भरा कदम है. खासकर यदि आपको हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या सांस संबंधी कोई समस्या है, तो मेडिकल चेकअप करवाना अनिवार्य है. इससे आप अपने शरीर की क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे और डॉक्टर ज़रूरत के हिसाब से आपको दवाएं सुझा सकते हैं. अपनी यात्रा किट में सिरदर्द, उल्टी, और बुखार जैसी सामान्य समस्याओं के लिए दवाएं, फर्स्ट-एड का सामान, और कोई भी व्यक्तिगत दवा ज़रूर रखें.

पहाड़ों पर स्वस्थ रहने के सुनहरे नियम

ऊंचाई वाले इलाकों में स्वस्थ रहने का सबसे बड़ा मंत्र धीरे-धीरे ऊंचाई की ओर बढ़ना है. आपके शरीर को कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के साथ तालमेल बिठाने के लिए समय चाहिए होता है, जिसे ‘एक्यूट माउंटेन सिकनेस’ (AMS) से बचने के लिए ज़रूरी माना जाता है. इसके कुछ सामान्य नियम हैं:

धीरे-धीरे चढ़ाई करें: 2,500 मीटर (लगभग 8,000 फीट) से अधिक ऊंचाई पर जाने के बाद, एक दिन में 500 मीटर से ज़्यादा की चढ़ाई करके न सोएं.

पर्याप्त पानी पिएं: पहाड़ों पर शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है. इसलिए, दिन भर में तीन से चार लीटर पानी या अन्य तरल पदार्थ जैसे जूस और नारियल पानी पिएं.

संतुलित आहार लें: यात्रा के दौरान भारी और तला हुआ भोजन करने से बचें. अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ाएं, क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा देता है. साथ ही, सूखे मेवे और फल भी खाते रहें.

पूरी नींद लें: शरीर को आराम देने के लिए पर्याप्त नींद बहुत ज़रूरी है.

एल्टीट्यूड सिकनेस को पहचानें और対処 करें

एल्टीट्यूड सिकनेस या माउंटेन सिकनेस के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है. इसके शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द, जी मिचलाना, चक्कर आना, थकान और नींद न आना शामिल हैं. यदि आपको ऐसे लक्षण महसूस होते हैं, तो और अधिक ऊंचाई पर न जाएं. आराम करें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें. अगर लक्षण गंभीर हो जाएं, जैसे सांस लेने में बहुत ज़्यादा तकलीफ़, छाती में जकड़न या भ्रम की स्थिति, तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है और तुरंत किसी निचली जगह पर उतरना और डॉक्टरी सहायता लेना ज़रूरी है.

हृदय और अस्थमा के रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और यात्रा से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर बात करनी चाहिए. सही तैयारी और सावधानियों के साथ आप पहाड़ों की अपनी यात्रा का पूरा आनंद ले सकते हैं और स्वस्थ वापस लौट सकते हैं.

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