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शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के पीछे का सच, नोटबंदी और धोखे की कहानी…

The truth behind Shilpa Shetty and Raj Kundra, a story of demonetisation and deception...

Breaking Today, Digital Desk : आज हम एक ऐसे मामले पर बात करने वाले हैं जिसने काफी सुर्खियां बटोरी हैं – शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा से जुड़ा ‘लोन फ्रॉड’ केस और उसमें नोटबंदी का जिक्र. ये सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक कहानी है जिसमें पैसे, विश्वास और कुछ अनकही बातें शामिल हैं.

आपने शायद सुना होगा कि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी से पूछताछ की है. मामला 2017 का है, जब नितिन बारोठ नाम के एक बिजनेसमैन ने उन पर लगभग 1.51 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड का आरोप लगाया था. बारोठ का कहना था कि उन्हें एक कंपनी (जिसमें राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी पहले डायरेक्टर थे) से लोन दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन शर्तें पूरी होने के बावजूद उन्हें पैसे नहीं मिले और उनकी प्रॉपर्टी भी गिरवी रख ली गई.

अब सवाल ये उठता है कि शिल्पा और राज ने EOW को क्या बताया? रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ने अपने बयान में इस पूरे मामले को नोटबंदी से जोड़ दिया. जी हां, 2016 में हुई नोटबंदी! उन्होंने EOW को बताया कि नोटबंदी के बाद उनके बिजनेस में घाटा हुआ, जिसकी वजह से वे बारोठ को लोन नहीं दे पाए. उनका कहना था कि उस समय बाजार में नकदी की कमी हो गई थी और इससे उनकी कंपनी की आर्थिक हालत बिगड़ गई.

ये एक दिलचस्प मोड़ है, है ना? अक्सर हम नोटबंदी के बड़े-बड़े प्रभावों की बात करते हैं, लेकिन कैसे इसने व्यक्तिगत डील्स और बिजनेस समझौतों को प्रभावित किया, ये एक अलग पहलू है. शिल्पा और राज ने ये भी स्पष्ट किया कि जब यह डील हुई, तब वे कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे चुके थे और उन्हें इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं थी. लेकिन EOW अभी भी जांच कर रही है कि क्या उनके बयान सही हैं और क्या वाकई नोटबंदी ही इस देरी की एकमात्र वजह थी.

इस मामले में अभी भी कई परतें खुलनी बाकी हैं. देखना होगा कि आगे जांच में क्या सामने आता है. लेकिन यह घटना हमें दिखाती है कि कैसे बड़े आर्थिक फैसले छोटी-छोटी डील्स पर भी असर डालते हैं और कैसे कानूनी पचड़ों में कई बार अप्रत्याशित कारण सामने आ सकते हैं.

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