
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में इस्लामाबाद में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का झंडा फहराए जाने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यह सब तब हुआ जब अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत दौरे पर आने वाले थे. ऐसे में यह घटना पाकिस्तान की असली मंशा पर संदेह पैदा करती है. क्या यह सिर्फ एक संयोग था, या इसके पीछे कोई गहरी रणनीति छिपी है?
पूरा मामला क्या है?
असल में, एक वीडियो सामने आया जिसमें इस्लामाबाद के बेहद संवेदनशील ‘रेड ज़ोन’ इलाके में TTP का झंडा लगा हुआ दिखाई दिया. यह वो जगह है जहाँ कई अहम सरकारी इमारतें और विदेशी दूतावास हैं. जब मुत्ताकी भारत आने की तैयारी कर रहे थे, ठीक उसी समय ऐसी घटना का होना वाकई सोचने पर मजबूर करता है.
क्यों अहम है यह घटना?
पाकिस्तान हमेशा से यह दावा करता रहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ है, लेकिन TTP जैसे संगठनों के प्रति उसकी नीति हमेशा से अस्पष्ट रही है. TTP अक्सर पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं को अंजाम देता रहा है. ऐसे में राजधानी के बीचों-बीच इसका झंडा दिखना, यह बताता है कि या तो पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लग गई है, या फिर यह जानबूझकर किया गया एक ‘संदेश’ था.
मुत्ताकी की भारत यात्रा और पाकिस्तान का डर
मुत्ताकी की भारत यात्रा अफगानिस्तान और भारत के बीच बढ़ते संबंधों का संकेत देती है. तालिबान के सत्ता में आने के बाद से भारत ने अफगानिस्तान में मानवीय सहायता भेजना जारी रखा है, और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी बने हुए हैं. पाकिस्तान को शायद यह बात पसंद नहीं आ रही है कि भारत और तालिबान एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं.
पाकिस्तान को डर है कि अगर भारत और तालिबान के संबंध और गहरे होते हैं, तो अफगानिस्तान पर उसका प्रभाव कम हो सकता है. TTP के झंडे की घटना को इस संदर्भ में देखा जा सकता है कि शायद पाकिस्तान तालिबान को यह याद दिलाना चाहता था कि TTP अभी भी एक खतरा है और तालिबान को पाकिस्तान के हितों का ध्यान रखना चाहिए.
आगे क्या?
यह घटना केवल एक छोटा सा वाकया नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की जटिल भू-राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है. पाकिस्तान को अपनी आतंकवाद विरोधी नीतियों में पारदर्शिता लानी होगी. वहीं, भारत और अफगानिस्तान के बढ़ते संबंधों को देखकर यह साफ है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.




