कृषि और पशुपालन में तेज़ी, लेकिन ज़िलावार असमानता बनी चुनौती: योगी सरकार ने दिए सुधार के निर्देश

लखनऊ | उत्तर प्रदेश सरकार की हालिया उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र की स्थिति का विश्लेषण करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि जहाँ राज्य का कृषि उत्पादन वर्ष 2024-25 में 722 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचने की उम्मीद है — जो कि वर्ष 2020-21 की तुलना में 100 लाख मीट्रिक टन अधिक है — वहीं जिलों के बीच भारी उत्पादन अंतर सरकार की प्राथमिक चिंता है। राज्य में कुछ जिले ऐसे हैं जहाँ गेहूँ की उत्पादकता 46 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुँच चुकी है, जबकि कुछ जिलों में यह केवल 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास सीमित है। मुख्यमंत्री ने इस स्थिति को “विकास में असंतुलन” मानते हुए तकनीकी सहायता, कृषि जागरूकता अभियानों और फील्ड सपोर्ट के ज़रिए इस अंतर को कम करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश अब भी देश में सर्वाधिक पशुधन उत्पादन करने वाला राज्य है। विशेषकर भैंस पालन और डेयरी क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि केवल कुल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रति पशु उत्पादकता में सुधार लाना ज़रूरी है।




