
Breaking Today, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट टीम के चयनकर्ताओं को अब साहसिक और कड़े निर्णय लेने की ज़रूरत है, ख़ासकर जब बात तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह के कार्यभार प्रबंधन की हो। बुमराह निस्संदेह भारत के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं, लेकिन हर श्रृंखला में उन पर अत्यधिक निर्भरता टीम और उनके अपने करियर के लिए हानिकारक हो सकती है।
लगातार क्रिकेट खेलने से बुमराह पर पड़ने वाले शारीरिक और मानसिक दबाव को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। चयनकर्ताओं की यह प्राथमिकता होनी चाहिए कि वे उन्हें महत्वपूर्ण दौरों और बड़े टूर्नामेंटों के लिए तरोताज़ा और पूरी तरह से फिट रखें। इसके लिए उन्हें कुछ छोटी द्विपक्षीय श्रृंखलाओं में आराम देना आवश्यक हो सकता है, भले ही इसका मतलब कुछ मैचों में हार का जोखिम उठाना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुमराह को हर मैच में खिलाना एक अदूरदर्शी रणनीति है। पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि किसी भी खिलाड़ी को टीम से ऊपर नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बुमराह लगातार दो से अधिक टेस्ट मैच नहीं खेल सकते, तो उन्हें टीम का मुख्य गेंदबाज़ नहीं होना चाहिए।
यह ज़रूरी है कि बेंच पर बैठे अन्य प्रतिभाशाली तेज़ गेंदबाज़ों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख़ुद को साबित करने का अवसर दिया जाए। चयनकर्ताओं को टीम में गहराई बनाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि बुमराह की अनुपस्थिति में टीम का प्रदर्शन प्रभावित न हो। भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ उन दो टेस्ट मैचों में जीत हासिल की जिनमें बुमराह नहीं खेले थे, यह इस बात का प्रमाण है कि टीम दूसरों के साथ भी जीत सकती है।
अगर चयनकर्ता अभी भी कड़े फैसले लेने से हिचकिचाते हैं, तो वे न केवल बुमराह के शानदार करियर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को भी दांव पर लगा रहे हैं। एक या दो श्रृंखलाओं में आराम देकर अगर आप अपने सबसे बड़े मैच विनर को लंबे समय तक मैदान पर रख सकते हैं, तो यह एक समझदारी भरा और साहसिक फैसला होगा।






