
Breaking Today, Digital Desk : हम सभी अपने दिल के बारे में जानते हैं – वो जो हर पल धड़कता है और हमारे शरीर में खून पहुँचाता है। पर क्या आपको पता है कि हमारे शरीर में एक और चीज़ है जो दिल जितना ही ज़रूरी काम करती है? हम इसे ‘दूसरा दिल’ कह सकते हैं। और कमाल की बात ये है कि ज़्यादातर लोग इसके बारे में जानते ही नहीं हैं!
आपका ‘दूसरा दिल’ कहाँ छुपा है?
ये कोई रहस्यमयी अंग नहीं है बल्कि आपके शरीर का एक बहुत ही आम हिस्सा है – आपकी मांसपेशियाँ, ख़ासकर आपके पैरों की पिंडली की मांसपेशियाँ (calf muscles)।
अब आप सोचेंगे, मांसपेशियाँ दिल का काम कैसे कर सकती हैं? तो बात ये है कि जब आपका दिल पूरे शरीर में खून पंप करता है, तो वो खून धमनियों (arteries) के ज़रिए नीचे पैरों तक जाता है। लेकिन पैरों से खून को वापस दिल तक लाना एक बड़ा काम है, क्योंकि इसे गुरुत्वाकर्षण (gravity) के ख़िलाफ़ ऊपर की ओर जाना होता है।
यहीं पर आपकी पिंडली की मांसपेशियाँ काम आती हैं। जब आप चलते हैं या हिलते-डुलते हैं, तो ये मांसपेशियाँ सिकुड़ती और फैलती हैं। इस गतिविधि से आपकी नसों (veins) पर दबाव पड़ता है, जो एक पंप की तरह काम करता है। ये दबाव खून को ऊपर की ओर, दिल की तरफ धकेलता है। इसी को “मस्कुलर पंप” या “पिंडली पंप” (calf pump) कहते हैं।
क्यों ज़रूरी है ये ‘दूसरा दिल’?
अगर ये ‘दूसरा दिल’ ठीक से काम न करे, तो क्या होगा?
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खून का जमाव: पैरों में खून जमा होने लगेगा, जिससे सूजन (swelling) आ सकती है।
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थकान: पैरों में भारीपन और थकान महसूस होगी, क्योंकि कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं।
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वेरिकोज वेन्स: लंबे समय तक खून जमा रहने से नसें सूज सकती हैं और वेरिकोज वेन्स (varicose veins) की समस्या हो सकती है।
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डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT): सबसे ख़तरनाक बात, खून के थक्के (blood clots) जमने का जोखिम बढ़ जाता है, जिसे डीप वेन थ्रॉम्बोसिस कहते हैं। ये थक्के फेफड़ों तक पहुँचकर जानलेवा भी हो सकते हैं।
इसलिए, अपने ‘दूसरे दिल’ को स्वस्थ रखना उतना ही ज़रूरी है जितना अपने असली दिल को!
इसे कैसे रखें मज़बूत?
अच्छी बात ये है कि इसे मज़बूत रखना बहुत आसान है:
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चलते रहें: सबसे सरल और प्रभावी तरीका है चलते रहना। रोज़ाना थोड़ी देर चलना, टहलना या जॉगिंग करना आपके पिंडली पंप को सक्रिय रखता है।
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स्ट्रेच करें: पैरों और पिंडली की मांसपेशियों की हल्की स्ट्रेचिंग भी फायदेमंद होती है।
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उठें और चलें: अगर आपकी नौकरी ऐसी है जहाँ आपको लंबे समय तक बैठना पड़ता है, तो हर घंटे में 5-10 मिनट के लिए उठकर थोड़ा टहल लें।
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हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त पानी पीने से आपका रक्त संचार बेहतर रहता है।
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पैरों को ऊपर उठाएँ: लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने के बाद, कुछ देर के लिए अपने पैरों को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें।
अगली बार जब आप चलें, तो याद रखें कि आप सिर्फ़ आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि अपने शरीर के ‘दूसरे दिल’ को भी स्वस्थ रख रहे हैं! तो उठिए, चलिए और अपने पैरों को ये ज़रूरी काम करने दीजिए।






