
Breaking Today, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट टीम के इंग्लैंड दौरे पर, मैदान पर हो रहे खेल से ज़्यादा चर्चा टीम संयोजन और खिलाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर हो रही है। इस बहस के केंद्र में हैं तेज़ गेंदबाज़ ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर, और इस मुद्दे पर अनुभवी क्रिकेटर और कमेंटेटर दिनेश कार्तिक ने कुछ ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिन्होंने सीधे कप्तान शुभमन गिल और टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर उंगली उठाई है।
कार्तिक ने साफ तौर पर कहा है कि अगर कप्तान को अपने एक गेंदबाज़ पर भरोसा ही नहीं है, तो उसे प्लेइंग इलेवन में रखने का क्या मतलब है। उनका इशारा इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच की उस पारी की तरफ था, जहाँ भारत ने 100 से ज़्यादा ओवर गेंदबाज़ी की, लेकिन शार्दुल ठाकुर से सिर्फ छह ओवर ही कराए गए। कार्तिक का मानना है कि ओवल जैसे मैदान की पिच शार्दुल की गेंदबाज़ी के लिए बहुत अनुकूल थी और वहाँ चौथे तेज़ गेंदबाज़ का होना टीम के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता था।
दिनेश कार्तिक ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर कप्तान शुभमन गिल की अनुभवहीनता को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि शुभमन यह समझ नहीं पा रहे हैं कि शार्दुल ठाकुर से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे निकाला जाए।” हालाँकि, कार्तिक ने यह भी स्वीकार किया कि जब शार्दुल को गेंदबाज़ी का मौका मिला, तो वह महंगे साबित हुए, जिससे शायद कप्तान का उन पर भरोसा कम हो गया।
यह मामला सिर्फ़ कार्तिक की राय तक ही सीमित नहीं है। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने भी शार्दुल जैसे खिलाड़ियों को “कामचलाऊ” (bits and pieces) क्रिकेटर करार देते हुए कहा है कि ऐसे खिलाड़ी आपको विदेश में टेस्ट मैच नहीं जिता सकते। उधर, खुद शार्दुल ठाकुर ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दबे शब्दों में यह स्वीकार किया था कि जब किसी गेंदबाज़ को इतने कम ओवर मिलते हैं, तो उसके लिए लय हासिल करना मुश्किल हो जाता है।
कुल मिलाकर, शार्दुल ठाकुर का मामला भारतीय टीम के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है। टीम मैनेजमेंट उन्हें बल्लेबाज़ी में गहराई लाने वाले एक गेंदबाज़ी ऑलराउंडर के तौर पर देखती है, लेकिन मैदान पर कप्तान का उन पर भरोसा न दिखाना इस रणनीति को पूरी तरह से खोखला साबित कर रहा है। यह स्थिति न सिर्फ टीम के संतुलन को बिगाड़ रही है, बल्कि एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी के मनोबल को भी प्रभावित कर रही है।






