
Breaking Today, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाजी के अगुआ, जसप्रीत बुमराह, एक बार फिर अपने करियर के दोराहे पर खड़े हैं। उनकी असाधारण प्रतिभा और मैच जिताने की क्षमता पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन उनका शरीर, विशेष रूप से उनकी पीठ, बार-बार उन्हें धोखा दे रही है। हालिया इंग्लैंड दौरे पर उन्हें केवल तीन टेस्ट मैचों में ही खिलाया गया, जो टीम प्रबंधन की उन्हें लेकर चिंता और सावधानी को दर्शाता है। यह सिर्फ कार्यभार प्रबंधन नहीं, बल्कि चोट प्रबंधन की एक सोची-समझी रणनीति थी।
लंबे समय से चोटों से जूझ रहे बुमराह के लिए हर सीरीज एक नई चुनौती लेकर आती है। उनका गेंदबाजी एक्शन, जो उनकी सफलता का राज है, वही उनके शरीर पर भारी भी पड़ता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत अपने इस अनमोल हीरे को हमेशा के लिए खोने का जोखिम उठा सकता है?
क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों की मानें तो इसका जवाब ‘नहीं’ है। कई लोगों का मानना है कि बुमराह को अब टेस्ट क्रिकेट की कठोर मांगों से कुछ हद तक दूर होकर सफेद गेंद (वनडे और टी20) क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसका एक बड़ा कारण भविष्य में होने वाले बड़े टूर्नामेंट हैं। भारत को 2026 में टी20 विश्व कप और 2027 में वनडे विश्व कप जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में अपने सबसे बड़े हथियार की सख्त जरूरत होगी।
यह सलाह इसलिए भी जोर पकड़ रही है क्योंकि भारत की तेज गेंदबाजी की अगली पीढ़ी अब तैयार दिख रही है। मोहम्मद सिराज ने इंग्लैंड के खिलाफ सभी पांच टेस्ट खेलकर अपनी फिटनेस और काबिलियत का लोहा मनवाया है। उनके अलावा आकाश दीप और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे गेंदबाजों ने भी दिखाया है कि वे जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं। घरेलू पिचों पर, जहां स्पिनरों का दबदबा रहता है, वहां बुमराह को आराम देना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।
हालांकि, बुमराह खुद तीनों प्रारूपों में खेलने की इच्छा रखते हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम प्रबंधन कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। उनका लक्ष्य बुमराह के करियर को लंबा खींचना है, ताकि वह बड़े मंच पर भारत के लिए मैच जीतते रहें।
यह एक मुश्किल फैसला है – एक ऐसे चैंपियन गेंदबाज को उसके पसंदीदा प्रारूप से दूर रखना जिसने अकेले दम पर कई मैच जिताए हैं। लेकिन क्रिकेट के पंडितों का मानना है कि यह बुमराह और भारतीय क्रिकेट दोनों के हित में है। अब देखना यह होगा कि क्या बुमराह अपनी भूमिका बदलते हैं और सफेद गेंद के विशेषज्ञ के रूप में अपने करियर को एक नई दिशा देते हैं।






