
Breaking Today, Digital Desk : लंदन के ऐतिहासिक केनिंग्टन ओवल मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में चौथी पारी में लक्ष्य का पीछा करना कभी भी आसान नहीं रहा है। इस मैदान का 123 साल पुराना रिकॉर्ड इस बात का सबूत है कि यहां बड़े लक्ष्य को भेदना लगभग नामुमकिन है। भारत और इंग्लैंड के बीच चल रहे मौजूदा टेस्ट मैच में, जहाँ भारत ने इंग्लैंड को 374 रनों का विशाल लक्ष्य दिया है, यह इतिहास भारतीय टीम के लिए एक सुखद संकेत दे रहा है।
ओवल में टेस्ट क्रिकेट के इतिहास पर नजर डालें तो आज तक कोई भी टीम 300 से अधिक रनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल नहीं कर पाई है।[1] इस मैदान पर सबसे बड़े सफल रन चेज़ का रिकॉर्ड 1902 का है, जब मेजबान इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 9 विकेट खोकर 263 रन बनाए थे और एक विकेट से रोमांचक जीत दर्ज की थी। यह रिकॉर्ड एक सदी से भी ज्यादा समय से अटूट है, जो ओवल की पिच पर चौथी पारी में बल्लेबाजी की कठिनाई को दर्शाता है।
ओवल में सर्वोच्च सफल रन चेज़:
263 रन: इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया (1902)
252 रन: वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड (1963)
242 रन: ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड (1972
225 रन: वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड (1988)
219 रन: श्रीलंका बनाम इंग्लैंड (2024)
इन आंकड़ों से साफ है कि ओवल में 250 से ऊपर का लक्ष्य भी केवल दो बार ही हासिल किया गया है। 21वीं सदी में तो सबसे बड़ा सफल रन चेज़ श्रीलंका ने 2024 में किया था, जब उन्होंने 219 रन का लक्ष्य हासिल किया था।
मौजूदा परिदृश्य में, इंग्लैंड को जीत के लिए 374 रन बनाने हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें न केवल मैच जीतना होगा, बल्कि 123 साल पुराना इतिहास भी बदलना होगा। हालांकि इंग्लैंड की टीम हाल के दिनों में बड़े लक्ष्य का पीछा करने के लिए जानी जाती है, जैसा कि उन्होंने 2022 में भारत के खिलाफ एजबेस्टन में 378 रन और 2025 में लीड्स में 371 रन बनाकर दिखाया था, लेकिन ओवल की पिच एक बिल्कुल अलग चुनौती पेश करती है।
जहां तक भारत का सवाल है, इस मैदान पर उनका सबसे सफल रन चेज़ 1971 में आया था, जब उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 173 रनों का लक्ष्य हासिल किया था। भारतीय गेंदबाजों के पास इतिहास को दोहराने और अपनी टीम को एक और यादगार जीत दिलाने का सुनहरा मौका है, बशर्ते वे ओवल के रिकॉर्ड को अपनी प्रेरणा बनाएं।






