
Breaking Today, Digital Desk : क्रिकेट में एक खिलाड़ी की जर्नी ना बड़ी उतार-चढ़ाव भरी होती है। आज कोई हीरो होता है, तो कल वो ही अपनी जगह बनाने के लिए जूझ रहा होता है। ऐसा ही कुछ आजकल साई सुदर्शन के साथ हो रहा है, लगता है। एक समय था जब वो हर मैच में कमाल कर रहे थे, लेकिन अब ऐसा लग रहा है जैसे वो खुद पर से विश्वास खोते जा रहे हैं।
याद है वो IPL फाइनल? उस दिन क्या कमाल खेला था उसने! हर शॉट में कॉन्फिडेंस दिख रहा था। लेकिन उसके बाद से, ऐसा लगा जैसे वो खिलाड़ी कहीं छुप गया है। मुझे लगता है कि हर बड़े खिलाड़ी की तरह, साई को भी बस एक अच्छे प्रदर्शन की जरूरत है जो उसकी ‘सेल्फ-बिलीफ’ वापस ला सके।
आजकल वो जो खेल रहा है, उसमें वो ‘फाइटिंग स्पिरिट’ कम दिख रही है। ऐसा नहीं है कि वो खराब खिलाड़ी है, बिल्कुल नहीं! टैलेंट तो कूट-कूट कर भरा है उसमें। बस शायद वो खुद को कुछ ज्यादा ही एनालाइज कर रहा है। कभी-कभी ना, हम जितना ज्यादा सोचते हैं, उतना ही खराब खेलते हैं।
देखो, इंटरनेशनल क्रिकेट में जगह बनाना और उसे बनाए रखना आसान नहीं है। हर गेंद पर प्रेशर होता है, हर मैच में उम्मीदें होती हैं। लेकिन साई को समझना होगा कि ये सब गेम का हिस्सा है। उसे बस अपनी नेचुरल गेम पर भरोसा करना है, वही गेम जो उसने हमें IPL फाइनल में दिखाई थी।
मुझे लगता है कि अब उसे सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए, बाहर की बातों पर नहीं। जो चला गया, उसे भूल जाओ। आगे देखो। एक अच्छी पारी, एक अच्छी इनिंग, बस एक मौका, और वो फिर से वही पुराना साई सुदर्शन बन जाएगा, जो किसी से डरता नहीं, जो हर बॉल पर रन बनाने को देखता है।
हम सब चाहते हैं कि साई सुदर्शन फिर से चमकें, क्योंकि उसमें वो काबिलियत है। बस उसे अपनी खोई हुई ‘सेल्फ-बिलीफ’ वापस पानी है। ये एक लड़ाई है जो उसे खुद से लड़नी होगी, और मुझे यकीन है कि वो इसे जीत जाएगा।





