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बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था पर फिर उठे सवाल, अब ‘कैट कुमार’ ने मांगा आवासीय प्रमाण पत्र…

Questions raised again on the administrative system in Bihar, now 'CAT Kumar' has asked for residential certificate

Breaking Today, Digital Desk : बिहार में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस बार रोहतास जिले में ‘कैट कुमार’ नाम से एक आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया है, जिसमें आवेदक के पिता का नाम ‘कैटी बॉस’ और माता का नाम ‘कैटिया देवी’ बताया गया है. यह घटना कुछ ही हफ़्ते पहले हुए “डॉग बाबू” प्रकरण की याद दिलाती है, जिसमें एक कुत्ते के नाम पर आवासीय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया था.

यह विचित्र आवेदन सामने आने के बाद रोहतास के जिलाधिकारी उदिता सिंह ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उनके आदेश पर नसरीगंज के राजस्व अधिकारी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई है. अधिकारियों का मानना है कि यह हरकत सरकार और सार्वजनिक सेवाओं की छवि को खराब करने की एक साजिश है और इससे सरकारी काम में बाधा उत्पन्न हुई है.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चल रहा है. आवासीय प्रमाण पत्र मतदाता कार्ड के सत्यापन के लिए एक आवश्यक दस्तावेज है, और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोग शरारत या धोखाधड़ी के इरादे से इस प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे हैं.

यह कोई अकेली घटना नहीं है. “डॉग बाबू” और “कैट कुमार” के अलावा, मुंगेर जिले में ‘सोनालिका कुमारी’ के नाम से भी एक आवासीय प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जिसमें आवेदक की तस्वीर की जगह सोनालिका ट्रैक्टर की तस्वीर लगी थी. यहां तक कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति “डोनाल्ड जॉन ट्रंप” के नाम से भी फर्जी आधार कार्ड के साथ एक आवेदन समस्तीपुर में जमा किया गया था.

इन घटनाओं ने राज्य में प्रशासनिक प्रणालियों में गंभीर खामियों को उजागर किया है. “डॉग बाबू” मामले में, प्रमाण पत्र पर एक राजस्व अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर भी थे, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर और भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे. बाद में उस प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की गई.

विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को लेकर सरकार की तीखी आलोचना की है. वहीं, अधिकारीयों का कहना है कि इस तरह की फर्जी अर्जियां प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी हैं और ऐसी हरकतों से सख्ती से निपटा जाएगा.

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