
Breaking Today, Digital Desk : बिहार के बगहा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक छह वर्षीय बच्चा तेज बुखार से पीड़ित था और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उसे एंटी-रेबीज का इंजेक्शन लगा दिया गया। इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला बगहा के अनुमंडलीय अस्पताल का है, जहां पिपरिया गांव के रहने वाले संजय चौधरी अपने पोते सौरव कुमार को 104 डिग्री फारेनहाइट बुखार के चलते लेकर पहुंचे थे। ओपीडी में मौजूद डॉक्टर ने कथित तौर पर बच्चे की जांच किए बिना ही पर्चे पर एंटी-रेबीज की तीसरी खुराक लिख दी। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी ने भी बिना किसी जांच-पड़ताल के बच्चे को इंजेक्शन लगा दिया।
परिवार वालों को इस बात की जानकारी तब हुई जब स्वास्थ्यकर्मी ने उन्हें अगली खुराक के लिए 1 सितंबर को आने के लिए कहा। यह सुनते ही परिवार के होश उड़ गए क्योंकि बच्चे को कभी किसी कुत्ते ने नहीं काटा था। उन्होंने तुरंत अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया और इसे डॉक्टरों की घोर लापरवाही बताया।
मामला सामने आने के बाद अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि एक दूसरे मरीज की पर्ची गलती से इस बच्चे की पर्ची के साथ मिल गई थी। उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि इस इंजेक्शन से बच्चे को कोई खतरा नहीं है और बाद में बच्चे को बुखार की दवा दी गई।
इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश भर दिया है और उन्होंने दोषी स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला बिहार के सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली और स्वास्थ्य तंत्र पर एक गंभीर सवालिया निशान छोड़ता है।




