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नौकरी के entretien में पूछा- कितने बच्चे हैं, फिर किया रिजेक्ट, महिला का छलका दर्द…

In the job application, the applicant asked- how many children do you have, Then he rejected her, the woman's pain spilled out

Breaking Today, Digital Desk : आज के दौर में जहां महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, वहीं समाज की एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि मातृत्व अक्सर उनके पेशेवर जीवन में एक बाधा बन जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक काबिल महिला को नौकरी देने से इसलिए इनकार कर दिया गया क्योंकि वह छोटे बच्चों की मां है। अपने साथ हुए इस भेदभाव को महिला ने सोशल मीडिया पर बयां किया है, जिसके बाद कार्यस्थलों पर महिलाओं, खासकर मांओं के प्रति होने वाले रवैये पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

एक महिला ने हाल ही में एक कंपनी में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) पद के लिए आवेदन किया था। entretien के दौरान उनसे उनकी पेशेवर योग्यता या अनुभव के बजाय ज्यादातर व्यक्तिगत सवाल पूछे गए। महिला के अनुसार, उनसे पूछा गया कि उनके परिवार में कौन-कौन है, उनके कितने बच्चे हैं और उनकी उम्र क्या है। इन सवालों के अगले ही दिन, कंपनी के एचआर विभाग ने उन्हें व्हाट्सएप पर “माफ़ कीजिए, आपको रिजेक्ट कर दिया गया है” जैसा सपाट संदेश भेजकर सूचित किया।

जब महिला ने अपनी योग्यता पर कोई सवाल न पूछे जाने का हवाला देते हुए रिजेक्शन का कारण जानना चाहा, तो उसे कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उसने जब सीधे तौर पर पूछा कि “क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि मेरे बच्चे बहुत छोटे हैं?” तो इस बात को भी एक वजह के तौर पर बताया गया। इस बातचीत का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए, महिला ने अपने दर्द को بیان किया है। उन्होंने लिखा कि यह पहली बार नहीं है जब मातृत्व उनके करियर के रास्ते में आया है।

यह घटना उन हजारों कामकाजी मांओं की दुर्दशा को उजागर करती है, जिन्हें अक्सर अपने बच्चों और करियर के बीच एक को चुनने के लिए मजबूर किया जाता है। कई कंपनियों में आज भी यह मानसिकता है कि छोटे बच्चों वाली महिलाएं काम पर पूरा ध्यान नहीं दे पाएंगी या उन्हें बार-बार छुट्टी लेनी पड़ेगी। इसी वजह से कई बार योग्य महिला उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

यह मामला कार्यस्थल पर “मातृत्व दंड” (maternity penalty) की गंभीर समस्या को भी दर्शाता है, जहां महिलाओं को मां बनने के कारण वेतन वृद्धि, पदोन्नति और यहां तक कि नौकरी से भी वंचित कर दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को अधिक सहायक नीतियां बनाने की आवश्यकता है, जिसमें लचीले काम के घंटे और क्रेच जैसी सुविधाएं शामिल हों, ताकि महिलाएं अपने परिवार और काम के बीच संतुलन बना सकें।

इस घटना के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, कई लोगों ने महिला के समर्थन में आवाज उठाई है और कंपनी के इस रवैये की आलोचना की है। लोगों का कहना है कि किसी की पारिवारिक स्थिति के आधार पर नौकरी से इनकार करना न केवल अनैतिक है, बल्कि भेदभावपूर्ण भी है। भारत में मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (2017 में संशोधित) जैसे कानून गर्भावस्था के दौरान या बाद में महिलाओं को नौकरी से हटाने पर रोक लगाते हैं, लेकिन ऐसे मामलों का सामने आना चिंताजनक है।

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