
Breaking Today, Digital Desk : कर्नाटक में इन दिनों ‘जाति जनगणना’ का मुद्दा खूब गरमाया हुआ है. खासकर, इस सर्वे में पूछे जा रहे कुछ सवालों को लेकर सियासी पारा चढ़ता जा रहा है. ताजा मामला उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से जुड़ा है, जो सर्वे के दौरान पूछे गए कुछ सवालों से इतने नाराज हुए कि उन्होंने खुलकर अपनी भड़ास निकाली. उनकी नाराजगी इस बात को लेकर थी कि उनसे उनके कारोबार और आय के बारे में बेहद निजी सवाल पूछे गए, जैसे क्या उनके पास मुर्गी फार्म या भेड़ पालन का व्यवसाय है?
“क्या मैं पोल्ट्री का धंधा कर रहा हूँ?” – शिवकुमार का गुस्सा
बेंगलुरु के सदाशिवनगर में जब सर्वे करने वाले लोग शिवकुमार के घर पहुंचे, तो उनसे कई सवाल पूछे गए. इसमें उनकी संपत्ति, व्यवसाय और आय से जुड़ी जानकारी मांगी गई. शिवकुमार ने बाद में मीडिया से बात करते हुए अपनी खीझ व्यक्त की. उन्होंने कहा, “मुझसे पूछा गया कि क्या मेरे पास कोई मुर्गी फार्म या भेड़ पालन का व्यवसाय है. क्या मैं कोई पोल्ट्री का धंधा कर रहा हूँ? ये कैसे सवाल हैं?” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे सवाल पूछना ठीक नहीं है और इससे लोगों में भ्रम पैदा होगा. शिवकुमार ने यह भी कहा कि अगर वे इस सर्वे से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक करेंगे, तो काफी कुछ सामने आएगा.
बीजेपी ने तुरंत लपका मौका, कसा तंज
इस मौके को बीजेपी ने तुरंत भुनाया. कर्नाटक बीजेपी ने शिवकुमार के बयान को लेकर उन पर जोरदार हमला बोला. बीजेपी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “डीके शिवकुमार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह सर्वे से क्यों डर रहे हैं. उन्होंने खुद एक बार 420 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी, तो अब उन्हें अपनी आय बताने में क्या दिक्कत है?” बीजेपी ने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि “कांग्रेस को भी यह बताना चाहिए कि उन्हें अपने डिप्टी सीएम की आय सार्वजनिक करने में क्या समस्या है?” बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए जाति जनगणना की बात करती है, लेकिन जब अपने नेताओं की बात आती है, तो वे पीछे हट जाते हैं.
क्या है ये जाति जनगणना और क्यों हो रहा है विवाद?
दरअसल, कर्नाटक सरकार ने राज्य में एक सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण (जिसे आम बोलचाल में जाति जनगणना कहा जा रहा है) शुरू किया है. इसका मकसद राज्य की जनसंख्या की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता लगाना है, ताकि बेहतर नीतियां बनाई जा सकें. हालांकि, इस सर्वे में पूछे जा रहे सवालों की प्रकृति को लेकर लगातार विवाद हो रहा है. कई लोग इसे निजता का उल्लंघन बता रहे हैं, जबकि कुछ को लगता है कि इससे समाज में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है.
अब देखना यह होगा कि शिवकुमार की नाराजगी और बीजेपी के तंज के बाद इस जाति जनगणना का भविष्य क्या होता है. क्या सरकार सवालों के प्रारूप में बदलाव करेगी, या यह मुद्दा और सियासी रंग पकड़ेगा?






