
Breaking Today, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट जगत में उस वक्त भूचाल आ गया, जब दो सबसे बड़े सितारों, विराट कोहली और रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। अब इस मामले में पूर्व भारतीय क्रिकेटर करसन घावरी ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और चयनकर्ताओं को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। घावरी का दावा है कि इन दोनों दिग्गजों ने अपनी मर्जी से संन्यास नहीं लिया, बल्कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया।
घावरी ने आरोप लगाया है कि BCCI की “आंतरिक और तुच्छ राजनीति” के कारण इन दोनों बेहतरीन खिलाड़ियों का टेस्ट करियर समय से पहले समाप्त हो गया। उन्होंने कहा, “यह बीसीसीआई की अंदरूनी राजनीति के कारण है, जिसे समझना मुश्किल है…उन्हें बाहर जाने के लिए कहा गया था। ऐसा नहीं है कि वे जाना चाहते थे। वे बने रहना चाहते थे। लेकिन चयनकर्ताओं और बीसीसीआई के विचार अलग थे।”
विराट कोहली और रोहित शर्मा ने मई 2025 में इंग्लैंड दौरे से ठीक पहले टेस्ट क्रिकेट से अपने संन्यास की घोषणा की थी। इस फैसले ने सभी को हैरान कर दिया था। घावरी का मानना है कि कोहली कम से कम दो साल और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। उन्होंने इस बात पर भी निराशा जताई कि कोहली जैसे महान खिलाड़ी को बीसीसीआई द्वारा विदाई मैच तक नहीं दिया गया।
कोहली ने अपने 14 साल के शानदार टेस्ट करियर का अंत 123 मैचों में 9,230 रनों के साथ किया, जिसमें 30 शतक शामिल हैं। वह भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान भी रहे, जिनकी कप्तानी में टीम ने 68 में से 40 मैच जीते। वहीं, रोहित शर्मा ने 67 टेस्ट मैचों में 40.58 की औसत से 4,301 रन बनाए, जिसमें 12 शतक शामिल हैं।
घावरी के इस बयान ने भारतीय क्रिकेट में एक नई बहस छेड़ दी है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या वाकई भारतीय क्रिकेट में अपने दिग्गजों के साथ सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है? हालांकि, बीसीसीआई ने इन आरोपों पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन इस विवाद ने निश्चित रूप से कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ दिए हैं। खबरों के मुताबिक, यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि दोनों जल्द ही वनडे से भी संन्यास ले सकते हैं, जिससे 2027 में विश्व कप खेलने का उनका सपना टूट सकता है।






