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बुमराह पर बड़ा सवाल, क्या फाइनल टेस्ट में भारतीय टीम मैनेजमेंट लेगा जोखिम…

Big question on Bumrah, Will the Indian team management take a risk in the final test

Breaking Today, Digital Desk : इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें और आखिरी टेस्ट मैच से पहले भारतीय खेमे में सबसे बड़ा सवाल जसप्रीत बुमराह को लेकर है। क्या टीम इंडिया अपने सबसे बड़े हथियार को इस निर्णायक मुकाबले में मैदान पर उतारेगी? यह एक ऐसा सवाल है जिसने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों, विशेषज्ञों और टीम प्रबंधन को दुविधा में डाल दिया है। एक तरफ सीरीज बराबर करने का सुनहरा मौका है, तो दूसरी तरफ अपने स्टार गेंदबाज के भविष्य को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी।

श्रृंखला की शुरुआत से पहले ही यह तय हो गया था कि बुमराह अपने कार्यभार प्रबंधन के तहत पांच में से केवल तीन टेस्ट ही खेलेंगे, और वह अपना कोटा पूरा कर चुके हैं। पिछले मैच में उनकी थोड़ी थकी हुई गेंदबाजी और रफ्तार में कमी ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि कहीं एक और मैच का बोझ उनके शरीर पर भारी न पड़ जाए। उनकी हालिया पीठ की चोटों के इतिहास को देखते हुए, टीम कोई भी जोखिम लेने से बचना चाहेगी।

लेकिन यह कोई आम मैच नहीं है। यह ओवल का मैदान है और सामने सीरीज 2-2 से बराबर करने की चुनौती। बुमराह जैसे विश्व स्तरीय गेंदबाज की मौजूदगी भारतीय टीम के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक बढ़ावा हो सकती है। मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल ने अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं। गंभीर ने पुष्टि की है कि सभी तेज गेंदबाज फिट और चयन के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन बुमराह के खेलने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। गिल का भी यही मानना है कि अगर बुमराह पूरी तरह से फिट महसूस करते हैं, तो यह टीम के लिए बहुत बड़ी बात होगी।

पूर्व क्रिकेटरों का भी मानना है कि यह फैसला आसान नहीं है। कुछ का कहना है कि जब बुमराह थके हुए लग रहे हैं, तो उन्हें खिलाना एक अनावश्यक जोखिम होगा, खासकर जब टीम के पास अन्य तेज गेंदबाज मौजूद हैं। वहीं, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने महत्वपूर्ण मैच में अपने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज को बाहर रखना मुश्किल है।

अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि टीम प्रबंधन बुमराह को लेकर “वाइल्डकार्ड” दृष्टिकोण अपना सकता है, यानी मैच के ठीक पहले उनकी फिटनेस का अंतिम आकलन किया जाएगा। ओवल टेस्ट में भारतीय टीम की गेंदबाजी का संयोजन काफी कुछ इस एक फैसले पर निर्भर करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम दिल की सुनती है या दिमाग की। क्या वे सीरीज बचाने के लिए अपने ‘ब्रह्मास्त्र’ का इस्तेमाल करेंगे या भविष्य को देखते हुए उसे तरकश में ही रखेंगे? जवाब जल्द ही मिलेगा, लेकिन यह बहस भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े फैसलों में से एक के रूप में याद की जाएगी।

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