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गणेश चतुर्थी और अली गोनी, एक एक्टर का अपनी आस्था पर मज़बूत विश्वास…

Ganesh Chaturthi and Aly Goni, an actor with a strong belief in his faith...

Breaking Today, Digital Desk : अभी हाल ही में गणेश चतुर्थी का त्योहार बीता है और हर तरफ गणपति बप्पा की धूम थी। बॉलीवुड से लेकर आम लोगों तक, सभी ने बड़े जोश और श्रद्धा के साथ इस त्योहार को मनाया। ऐसे में टीवी के पॉपुलर एक्टर अली गोनी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वो अपने दोस्त राहुल वैद्य के साथ गणपति विसर्जन में शामिल थे। सब कुछ ठीक था, लेकिन एक बात थी जिसने सबका ध्यान खींचा – अली गोनी ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयकारा नहीं लगा रहे थे। इस बात पर कुछ लोगों ने सवाल उठाए, तो कुछ ने उन्हें ट्रोल भी किया। अब अली गोनी ने खुद इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और बताया है कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया।

अली गोनी ने साफ किया कि ऐसा नहीं है कि वो गणेश जी का सम्मान नहीं करते या उनकी आस्था नहीं है। बल्कि इसकी वजह उनका अपना धर्म है। उन्होंने बताया कि इस्लाम में सिर्फ अल्लाह की इबादत की जाती है और किसी और देवी-देवता के आगे सिर झुकाना या उनके मंत्रों का जाप करना उनके धर्म के खिलाफ है। अली गोनी ने कहा, “मैं अल्लाह में विश्वास रखता हूं। मेरे धर्म में किसी और के आगे सिर झुकाना या किसी और के मंत्रों का जाप करना मना है। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं, लेकिन अपने धर्म के हिसाब से चलता हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि जब वो राहुल के साथ गणेश विसर्जन में गए थे, तब उन्होंने पूरे सम्मान के साथ खड़े होकर विसर्जन देखा। उन्होंने भगवान गणेश का आशीर्वाद भी लिया, लेकिन ‘गणपति बप्पा मोरया’ नहीं कहा। अली गोनी ने बताया कि उन्होंने ‘गणपति बप्पा’ कहा, लेकिन ‘मोरया’ इसलिए नहीं कहा क्योंकि वो एक मंत्र है। उन्होंने कहा, “मैं मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता, लेकिन मैं गणेश जी का आदर करता हूं। वो मेरे दोस्त के भगवान हैं और मैं उनके त्योहार में खुशी-खुशी शामिल होता हूं।”

अली गोनी के इस बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग उनके इस खुलेपन और अपनी आस्था पर अडिग रहने की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ लोग उन्हें अब भी ट्रोल कर रहे हैं। हालांकि, अली गोनी ने साफ कर दिया है कि उनके लिए अपना धर्म सर्वोपरि है और वो इसी हिसाब से अपनी जिंदगी जीते हैं।

यह सिर्फ अली गोनी की बात नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने धर्म और आस्था को निभाते हुए दूसरों के धर्म का सम्मान कर सकता है। धर्म एक निजी मामला है और हर किसी को अपने हिसाब से उसे मानने का पूरा हक है।

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