योगी का जातिवाद विरोधी दांव, BJP के सहयोगी क्यों हैं परेशान…
Yogi's anti-casteism move, Why are BJP allies worried...

Breaking Today, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक फैसला इन दिनों खूब चर्चा में है. उन्होंने जातिगत जनगणना और जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ एक बड़ा बयान दिया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ सहयोगी दल सकते में आ गए हैं. इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब बहस छिड़ी हुई है और सबकी अपनी-अपनी राय है.
योगी आदित्यनाथ ने साफ शब्दों में कहा है कि उनकी सरकार जातिवाद को बढ़ावा देने वाले किसी भी काम का समर्थन नहीं करेगी. उनका मानना है कि जाति आधारित विभाजन समाज को कमज़ोर करता है और सबको एक साथ मिलकर विकास के रास्ते पर चलना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता ‘सबका साथ, सबका विकास’ है, न कि किसी विशेष जाति को खुश करना.
सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया:
इस बयान के बाद BJP के सहयोगी दलों में थोड़ी बेचैनी दिख रही है, खासकर उन दलों में जो जातिगत राजनीति पर ज़्यादा निर्भर रहते हैं.
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अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी: ये दोनों दल BJP के साथ गठबंधन में हैं और इनका वोट बैंक काफी हद तक जाति आधारित है. इन दलों के नेताओं ने अभी तक सीधे तौर पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंदरखाने वे इस बयान से खुश नहीं हैं. उन्हें डर है कि योगी के इस रुख से उनके अपने वोट बैंक पर असर पड़ सकता है. निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि वे इस मुद्दे पर पार्टी के अंदर चर्चा करेंगे और फिर अपना पक्ष रखेंगे. वहीं, अपना दल के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे इस विषय पर पार्टी नेतृत्व से बात करेंगे.
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समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी: विपक्षी दलों ने योगी के इस बयान को पाखंड बताया है. समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि BJP हमेशा से जातिगत जनगणना के खिलाफ रही है और अब योगी जी का बयान उनकी इसी सोच को दिखाता है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार सच में जातिवाद खत्म करना चाहती है तो उसे सभी जातियों को उनका हक देना चाहिए. बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने भी इस बयान की आलोचना की और कहा कि BJP केवल दिखावा कर रही है, असल में वह जातिवादी मानसिकता को बढ़ावा देती है.
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि योगी का यह बयान एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. इसके कई पहलू हो सकते हैं:
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हिंदुत्व एजेंडा: BJP हमेशा से हिंदुत्व के एजेंडे पर चलती रही है, जिसमें जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर हिंदू एकता पर ज़ोर दिया जाता है. योगी का यह बयान इसी एजेंडे को मज़बूत करता है.
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वोट बैंक का समीकरण: कुछ विश्लेषकों का मानना है कि BJP अब जातिगत वोट बैंक से ऊपर उठकर एक बड़े वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है, जो विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर वोट देता है.
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सहयोगियों पर दबाव: यह बयान छोटे सहयोगी दलों पर दबाव बनाने का एक तरीका भी हो सकता है, ताकि वे BJP के बड़े एजेंडे से अलग न हटें.
आने वाले समय में देखना होगा कि योगी का यह ‘जातिवाद के खिलाफ’ फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति को किस ओर ले जाता है और BJP के सहयोगी दल इस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं. यह तय है कि इस बयान के बाद राज्य की सियासत में हलचल और तेज़ हो गई है.






