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कर्नाटक कमीशन का नया खेल, कांग्रेस पर 15% वसूली का आरोप…

Karnataka commission's new game, Congress accused of extorting 15%...

Breaking Today, Digital Desk : कर्नाटक में राजनीतिक घमासान एक बार फिर चरम पर है, और इस बार मुद्दा है “कमीशन”। राज्य के ठेकेदारों ने सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि परियोजनाओं को मंजूरी देने और बिलों का भुगतान करने के लिए 10-15% तक कमीशन की मांग की जा रही है। ये वही ठेकेदार हैं जिन्होंने पिछली भाजपा सरकार पर 40% कमीशन लेने का आरोप लगाया था।

क्या हैं ठेकेदारों के आरोप?

कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ (KSCA) के अध्यक्ष डी. केम्पन्या ने खुलकर सामने आकर कहा है कि कांग्रेस सरकार में कमीशन की दरें दोगुनी हो गई हैं। उनके अनुसार, अब ठेकेदारों को बिल पास करवाने के लिए 10 से 15 प्रतिशत कमीशन देना पड़ रहा है, जबकि पिछली भाजपा सरकार के समय यह 5-6% था। केम्पन्या ने यह भी दावा किया कि उनके पास इन दावों को साबित करने के लिए दस्तावेजी सबूत भी हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें एक मीटिंग के लिए बुलाया था, लेकिन उस मीटिंग में कोई समाधान नहीं निकला। ठेकेदारों का कहना है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।

भाजपा ने साधा निशाना: ‘ATM सरकार’ का टैग

इन आरोपों के सामने आते ही, भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार को “ATM सरकार” का नया टैग दिया है, जिसका अर्थ है कि यह सरकार केवल पैसे निकालने वाली मशीन बनकर रह गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले कमीशनखोरी के खिलाफ बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन सत्ता में आते ही उन्होंने खुद कमीशन की दरें बढ़ा दी हैं।

भाजपा की कर्नाटक इकाई ने सोशल मीडिया पर लगातार कांग्रेस सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह ‘वसूली सरकार’ है, और लोगों को इन आरोपों पर ध्यान देना चाहिए।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ये भाजपा प्रायोजित आरोप हैं और ठेकेदारों को भाजपा द्वारा उकसाया जा रहा है ताकि सरकार को बदनाम किया जा सके। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार दोनों ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

आगे क्या?

फिलहाल, इस मामले पर राजनीति गरमाई हुई है। ठेकेदारों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि भाजपा लगातार कांग्रेस पर हमलावर है। देखना यह होगा कि इस ‘कमीशन’ के खेल में कौन सा पक्ष भारी पड़ता है और क्या यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव लाता है।

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