
Breaking Today, Digital Desk : आप सबने स्मिता पाटिल का नाम तो सुना ही होगा. हिंदी सिनेमा की एक ऐसी अदाकारा, जिनकी आँखें ही बहुत कुछ कह जाती थीं. उनकी एक्टिंग इतनी दमदार थी कि लोग आज भी उन्हें याद करते हैं. लेकिन उनकी ज़िंदगी और मौत से जुड़ा एक ऐसा क़िस्सा है, जिसे सुनकर यक़ीन कर पाना मुश्किल हो जाता है.
आज भी जब उनकी बात होती है, तो उनकी अदाकारी के साथ-साथ उनके अचानक चले जाने का ग़म भी लोगों को कचोटता है. सिर्फ़ 31 साल की उम्र में, जब उनका करियर परवान चढ़ रहा था, वो हमें छोड़कर चली गईं. 13 दिसंबर 1986 को उनका निधन हो गया था, लेकिन उनकी मौत के बाद की कहानी किसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.
क्या आप जानते हैं कि स्मिता पाटिल का शव पूरे तीन दिन तक फ़्रिज में रखा रहा? जी हाँ, आपने सही सुना. इसके पीछे एक बहुत बड़ी वजह थी – उनके बेटे प्रतीक बब्बर का जन्म. दरअसल, प्रतीक समय से पहले पैदा हो गए थे, और डॉक्टर्स चाहते थे कि उन्हें पूरा मेडिकल सपोर्ट मिले. स्मिता जी उस वक़्त आईसीयू में थीं और उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी. डॉक्टर्स ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन बचा नहीं पाए.
लेकिन कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती. स्मिता जी की एक आख़िरी इच्छा थी, जो मरने से पहले उन्होंने अपने मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत से कही थी. वो चाहती थीं कि जब उनकी मौत हो, तो उन्हें एक सुहागन की तरह सजाया जाए, जैसे दुल्हन को सजाते हैं. बिंदी, चूड़ियाँ, सिंदूर – सब कुछ पूरा हो.
और उनकी इस इच्छा को पूरा किया गया. उनकी मौत के बाद, उनके शव को तीन दिन तक सुरक्षित रखा गया और फिर उनकी अंतिम यात्रा से पहले उन्हें पूरा दुल्हन का शृंगार किया गया. वो मंज़र बड़ा ही भावुक करने वाला था. बॉलीवुड के तमाम लोग वहां मौजूद थे, और ख़ुद अमिताभ बच्चन भी उस वक़्त वहीं थे.
सोचिए, एक तरफ़ एक माँ जो अपने नवजात बेटे को छोड़कर जा रही थी, दूसरी तरफ़ उसकी आख़िरी इच्छा को पूरा किया जा रहा था. ये घटना बताती है कि स्मिता पाटिल सिर्फ़ एक बेहतरीन अदाकारा ही नहीं, बल्कि एक बेहद संजीदा और भावनाओं से भरी इंसान भी थीं. उनकी ये कहानी आज भी लोगों को रुला देती है, और उनकी यादों को ताज़ा कर देती है.”






