
Breaking Today, Digital Desk : क्या आप जानते हैं कि अब किडनी ट्रांसप्लांट कराना पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो सकता है? वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिससे अब किसी भी ब्लड ग्रुप के मरीज़ को कोई भी किडनी लगाई जा सकेगी! यह वाकई मेडिकल साइंस में एक बहुत बड़ी छलांग है।
किडनी फेलियर दुनिया भर में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। कई लोगों को नई किडनी का इंतज़ार करते-करते सालों लग जाते हैं, और ब्लड ग्रुप का मैच होना एक बड़ी चुनौती होती है। लेकिन अब कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका ढूंढ निकाला है, जिससे इस मुश्किल को हल किया जा सकेगा।
कैसे काम करती है यह ‘जादुई’ किडनी?
वैज्ञानिकों ने एक ख़ास मशीन का इस्तेमाल किया, जिसे नॉमोथर्मिक परफ्यूजन कहते हैं। इस मशीन में उन्होंने इंसानी किडनी को सामान्य शरीर के तापमान पर रखा और फिर एक ‘ब्लड वॉश’ तकनीक का उपयोग किया। इसमें किडनी से पुराने ब्लड ग्रुप मार्कर (एंटीजन) हटा दिए जाते हैं। आसान भाषा में समझें तो, जिस तरह से आप कपड़ों से दाग हटाते हैं, वैसे ही किडनी की सतह से वे तत्व हटा दिए जाते हैं जो ब्लड ग्रुप की पहचान करते हैं।
अब तक, अगर किसी व्यक्ति का ब्लड ग्रुप ‘A’ है, तो उसे ‘A’ ब्लड ग्रुप वाली किडनी ही चाहिए होती थी। लेकिन इस नई तकनीक से किडनी को ‘O’ ब्लड ग्रुप जैसा बना दिया जाता है, जिसे ‘यूनिवर्सल डोनर’ माना जाता है। यानी, अब यह किडनी किसी भी ब्लड ग्रुप के मरीज़ को लगाई जा सकेगी!
किसके लिए है यह सबसे बड़ी खुशखबरी?
यह उन लोगों के लिए सबसे ज़्यादा फायदेमंद है जिनका ब्लड ग्रुप ‘B’ है। ‘B’ ब्लड ग्रुप वाली किडनी बहुत कम उपलब्ध होती हैं, इसलिए ऐसे मरीज़ों को ट्रांसप्लांट के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ता था। लेकिन अब उन्हें इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
आगे क्या होगा?
अभी इस तकनीक का इंसानों पर ट्रायल होना बाकी है, लेकिन शुरुआती नतीजे बहुत उत्साहजनक हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो आने वाले समय में किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में क्रांति आ सकती है। इससे न केवल मरीज़ों की जान बचेगी, बल्कि उन्हें नई ज़िंदगी भी मिलेगी।
यह वाकई एक उम्मीद भरी खबर है जो लाखों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। चिकित्सा विज्ञान की यह प्रगति हमारे जीवन को और बेहतर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।






