32 साल की सिंगल महिला,क्या मैं सच में जाति के बाहर शादी नहीं कर सकती…
32 year old single woman, can I really not marry outside my caste...

Breaking Today, Digital Desk : आजकल, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट बड़ी तेजी से वायरल हो रही है। यह कहानी है एक 32 साल की अविवाहित महिला की, जो अपनी जिंदगी में एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। उसने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया है कि कैसे बचपन से ही उसे यह सिखाया गया कि उसे अपनी जाति के बाहर किसी से शादी नहीं करनी चाहिए। अब, जब वह खुद शादी की उम्र में है और उसे कोई उपयुक्त साथी नहीं मिल रहा है, तो वह बहुत अकेला और डिप्रेशन में महसूस कर रही है।
उस महिला ने लिखा है कि उसके माता-पिता बहुत धार्मिक हैं और हमेशा से ही जाति व्यवस्था को बहुत महत्व देते रहे हैं। बचपन से ही उसे और उसकी बहनों को यही सिखाया गया कि उन्हें अपनी जाति के अंदर ही शादी करनी है। समाज और परिवार के दबाव ने उसके मन में यह बात इतनी गहराई से बिठा दी है कि अब वह चाहकर भी किसी और जाति के लड़के के बारे में सोच भी नहीं पाती।
उसने यह भी बताया कि वह एक अच्छे परिवार से आती है और अच्छी नौकरी भी करती है। उसके पास सब कुछ है, बस एक जीवनसाथी की कमी है। उसे कई बार अपनी जाति के बाहर के लड़कों से शादी के प्रस्ताव भी मिले, लेकिन उसके दिमाग में बचपन से डाली गई ये बात उसे आगे बढ़ने नहीं देती। अब उसे लग रहा है कि शायद उसे कभी शादी नहीं करनी चाहिए थी, या फिर उसे अपने माता-पिता की बात मानकर पहले ही शादी कर लेनी चाहिए थी। वह इस बात से भी परेशान है कि समाज में लोग उसे 32 साल की अविवाहित लड़की कहकर ताने मारते हैं।
यह कहानी सिर्फ इस एक महिला की नहीं है, बल्कि ऐसी कई महिलाओं और पुरुषों की है जो आज भी जाति व्यवस्था की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं। प्यार और रिश्ते जाति-धर्म से ऊपर होते हैं, लेकिन हमारा समाज अभी भी इस सोच से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है। यह समझना जरूरी है कि प्यार किसी सीमा को नहीं जानता। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहां लोग बिना किसी डर या दबाव के अपने जीवनसाथी को चुन सकें।






