
Breaking Today, Digital Desk : कुछ समय पहले की बात है, सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा वाकया हुआ था जिसने सबको हैरान कर दिया था। एक वकील साहब ने सुनवाई के दौरान ही तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस बी.आर. गवई पर कथित तौर पर जूता उछाल दिया था। आप सोच रहे होंगे कि इसके बाद क्या हुआ होगा? शायद उस वकील पर कड़ी कार्रवाई हुई होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उस वकील के खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है। यह फैसला जस्टिस गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनाया।
आखिर क्या था पूरा मामला?
दरअसल, यह घटना पिछले साल की है। सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई चल रही थी, जिसमें वकील हाज़िर नहीं हो पाए थे और इसकी वजह से मामला खारिज हो गया था। इसी बात पर नाराज़ होकर वकील साहब ने बेंच पर जूता उछाल दिया। इसके बाद कोर्ट स्टाफ और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने मिलकर उस वकील को तुरंत पकड़ लिया था।
चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने तब इस घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया था। उन्होंने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति सिस्टम से नाराज़ है, तो उसे अपनी बात कहने के लिए सही मंच और तरीका अपनाना चाहिए, न कि हिंसा या इस तरह के अशोभनीय व्यवहार का सहारा लेना चाहिए।
कोर्ट का फैसला और उसके पीछे की वजह
अब जब अवमानना की कार्रवाई पर फैसला आया है, तो कोर्ट ने इस मामले में आगे बढ़ने से मना कर दिया। जस्टिस गवई ने कहा कि उन्होंने (वकील ने) जो किया, वह उनके (जस्टिस गवई के) ऊपर नहीं आया। ऐसा लगता है कि कोर्ट ने इस मामले को ज़्यादा तूल न देते हुए एक तरह से माफ करने का रास्ता चुना है। यह दिखाता है कि न्यायपालिका कभी-कभी ऐसी घटनाओं को व्यक्तिगत रूप से न लेकर बड़ी तस्वीर देखती है।
यह फैसला हमें कई बातें सिखाता है। एक तो यह कि न्यायपालिका की गरिमा बनी रहनी चाहिए, लेकिन साथ ही कभी-कभी संयम और माफी भी ज़रूरी होती है। यह घटना ज़रूर चौंकाने वाली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भी कम चौंकाने वाला नहीं है।




