Sliderदेश-विदेश

एक फोन कॉल जिसने बदल दी शेख हसीना की किस्मत…

A phone call that changed Sheikh Hasina's fate...

Breaking Today, Digital Desk : क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी सी कॉल किसी की जिंदगी कैसे बचा सकती है? बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की जिंदगी में भी ऐसा ही एक पल आया था, जब भारत से सिर्फ 1:30 बजे की एक कॉल ने उनकी जान बचा ली। ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है, जिसका जिक्र एक नई किताब ‘बांग्लादेश एट 50: ए ट्रायम्फ ऑफ़ द पीपल’ में किया गया है।

ये बात है 15 अगस्त 1975 की। उस दिन, बांग्लादेश के संस्थापक और शेख हसीना के पिता, बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की परिवार समेत हत्या कर दी गई थी। सोचिए, उस वक्त शेख हसीना अपनी बहन शेख रेहाना के साथ जर्मनी में थीं। उन्होंने ये खबर बीबीसी पर सुनी और उनके पैरों तले जमीन खिसक गई होगी। उनके मन में सिर्फ एक ही सवाल था – अब क्या होगा?

उन्हें भारत में शरण लेने की सलाह दी गई थी। लेकिन मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हुईं। जर्मनी से उन्हें भारत आने की अनुमति मिल गई थी, पर जब वो फ्लाइट में थीं, तभी उन्हें बताया गया कि उन्हें नई दिल्ली में उतरने की इजाजत नहीं है। ये सुनकर कोई भी घबरा जाता, लेकिन तभी भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 130 बजे एक फोन किया। इस कॉल के बाद ही शेख हसीना और उनकी बहन को भारत आने की अनुमति मिली और वो 24 अगस्त 1975 को दिल्ली पहुंच पाईं।

सोचिए, अगर वो कॉल नहीं होती, तो क्या होता? इंदिरा गांधी ने सिर्फ एक फोन करके दो जिंदगियां बचा लीं। इस किताब में ऐसे कई और अनसुने किस्से हैं जो बांग्लादेश के इतिहास और भारत के साथ उसके गहरे रिश्तों को बताते हैं। यह सच में दिखाता है कि कैसे मुश्किल समय में पड़ोसी देश एक दूसरे के काम आते हैं।

Related Articles

Back to top button