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गोरखपुर ने मोतियाबिंद ऑपरेशन में रचा कीर्तिमान, प्रदेश में प्रथम स्थान

गोरखपुर। राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता एवं दृष्टिदोष नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत गोरखपुर जिले ने उत्तर प्रदेश में एक मिसाल कायम की है। जिले ने मोतियाबिंद ऑपरेशन के क्षेत्र में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। साथ ही स्कूलों में आंखों की जांच कर बच्चों को निःशुल्क चश्मा देने के मामले में भी गोरखपुर ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इस सराहनीय उपलब्धि पर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने सभी नेत्र सर्जनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, नेत्र परीक्षकों और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम को बधाई दी है। यह रैंकिंग मार्च 2025 तक की उपलब्धियों पर आधारित है।

डॉ. झा ने बताया कि 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का मोतियाबिंद ऑपरेशन जिले के सरकारी अस्पतालों और नौ निजी संगठनों द्वारा निःशुल्क किया जा रहा है। साथ ही 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की आंखों की जांच कर उन्हें निःशुल्क चश्मा भी प्रदान किया जाता है। इसके अलावा कार्निया बैंक, नेत्रदान, नेत्र रोगों की पहचान और इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बीते वर्ष तत्कालीन सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे और नोडल अधिकारी डॉ. अश्विनी चौरसिया के नेतृत्व में गोरखपुर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

आंकड़ों के अनुसार, गोरखपुर ने 74708 लोगों के मोतियाबिंद ऑपरेशन कराकर राज्य द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 114.57 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया है। वहीं स्कूल आई-स्क्रीनिंग के तहत 5556 बच्चों को निःशुल्क चश्मा वितरित कर 124.99 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। 45 वर्ष से अधिक आयु के दृष्टिदोष पीड़ितों की जांच और चश्मा वितरण के क्षेत्र में भी गोरखपुर ने 2777 लोगों को लाभान्वित कर 124.92 प्रतिशत उपलब्धि पाई है, जिससे जिले को राज्य स्तर पर सातवां स्थान प्राप्त हुआ है।

सीएमओ डॉ. झा ने बताया कि राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता एवं दृष्टिदोष नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य 2025 तक अंधता की दर को एक प्रतिशत से घटाकर 0.3 प्रतिशत तक लाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में 62 प्रतिशत अंधता मोतियाबिंद के कारण होती है, जिसे समय पर सर्जरी कर रोका जा सकता है। वहीं, 20 प्रतिशत बच्चों में अंधता दृष्टिदोष के कारण होती है, जिसे सही नंबर का चश्मा पहनाकर रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से जिले में लगातार नेत्र जांच शिविर, स्कूलों में स्क्रीनिंग और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

जल्द ही जिले के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन में सहयोग देने वाले चिकित्सकों, सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्यकर्मियों को जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। गोरखपुर की यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण है कि समर्पण और समन्वय से सरकारी योजनाओं को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

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