
Breaking Today, Digital Desk : जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा दिए जाने की अटकलों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इन चर्चाओं को ज्यादा तवज्जो न देते हुए कहा है कि उन्हें निकट भविष्य में किसी बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं है. हालांकि, उन्होंने संसद के मौजूदा मानसून सत्र से कुछ सकारात्मक उम्मीदें जताई हैं
एक सोशल मीडिया पोस्ट में अब्दुल्ला ने लिखा, “कल जम्मू-कश्मीर में क्या होने की उम्मीद है, इस बारे में मैंने हर तरह की बातें सुनी हैं. इसलिए मैं यह कहना चाहूंगा कि कल कुछ नहीं होगा – सौभाग्य से कुछ बुरा नहीं होगा लेकिन दुर्भाग्य से कुछ सकारात्मक भी नहीं होगा. उन्होंने आगे कहा कि वह संसद के इस मानसून सत्र में जम्मू-कश्मीर के लिए कुछ सकारात्मक होने को लेकर अब भी आशान्वित हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि यह कल ही हो
अब्दुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यह राय किसी आधिकारिक बातचीत या दिल्ली में हुई बैठकों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह उनका “मन का अहसास” है
यह बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं. ये अटकलें तब और तेज हो गईं जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इसके अलावा, गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के कुछ स्थानीय नेताओं से भी मुलाकात की है
गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था. तभी से विभिन्न राजनीतिक दल, विशेष रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस, राज्य के दर्जे की बहाली की मांग कर रहे हैं उमर अब्दुल्ला पहले भी कह चुके हैं कि अगर राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए विधानसभा भंग करके नए सिरे से चुनाव कराने पड़ें तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी.






