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भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने तोड़ी चुप्पी, पॉडकास्ट में सुनाई अपनी कहानी…

Fugitive businessman Vijay Mallya broke his silence, narrated his story in a podcast, presented a different perspective

Breaking Today, Digital Desk : लंबे समय से चुप्पी साधे, भारत के भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने हाल ही में राज शमानी के साथ एक पॉडकास्ट में अपनी कहानी का एक अलग ही पक्ष दुनिया के सामने रखा है। लगभग नौ वर्षों में अपने पहले विस्तृत साक्षात्कार में, माल्या ने अपने ऊपर लगे आरोपों, किंगफिशर एयरलाइंस के पतन और भारत से अपने विवादास्पद जाने पर खुलकर बात की। इस बातचीत ने एक बार फिर उनके मामले को सुर्खियों में ला दिया है, जिसमें उन्होंने खुद को परिस्थितियों का शिकार बताया और भारतीय न्याय व्यवस्था और मीडिया पर सवाल उठाए।

इस चार घंटे से अधिक लंबे पॉडकास्ट में, माल्या ने जोर देकर कहा कि वे देश छोड़कर नहीं भागे थे, बल्कि उनकी यात्रा पूर्व-नियोजित थी। उन्होंने कहा, “आप मुझे भगोड़ा कह सकते हैं, लेकिन चोर नहीं।” माल्या ने दावा किया कि बैंकों ने उनकी जब्त की गई संपत्तियों से कर्ज की मूल राशि से कहीं ज़्यादा की वसूली कर ली है। उन्होंने यह भी बताया कि 2012 और 2015 के बीच उन्होंने बैंकों को निपटान के लिए कई प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें स्वीकार नहीं किया गया।

अपने बचाव में, माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस की विफलता के लिए तत्कालीन सरकार की नीतियों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ भारत छोड़ने से पहले हुई एक “संक्षिप्त मुलाकात” का भी ज़िक्र किया, जिसने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। माल्या ने यह भी संकेत दिया कि अगर उन्हें भारत में निष्पक्ष सुनवाई का आश्वासन मिले तो वह वापस लौटने पर “गंभीरता से विचार” कर सकते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व कर्मचारियों से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी, जिन्हें वेतन न मिलने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

हालांकि, माल्या के दावों को आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों ने तथ्यों से परे बताया है। आलोचकों का कहना है कि माल्या सहानुभूति हासिल करने के लिए एक भावनात्मक कहानी गढ़ रहे हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारतीय अदालतों ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया हुआ है और वह धोखाधड़ी तथा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में भारत में वांछित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी पाया था और 2022 में इस मामले में चार महीने की जेल की सजा भी सुनाई थी। आलोचकों के अनुसार, माल्या अभी भी बैंकों का एक बड़ा बकाया चुकाने में विफल रहे हैं और उनके दावे, जैसे कि पूरा कर्ज चुका दिया गया है, भ्रामक हैं।

इस पॉडकास्ट ने भले ही माल्या को अपनी कहानी बताने का एक मंच दिया हो, लेकिन यह उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों और अदालत के फैसलों की सच्चाई को नहीं बदलता। यह मामला भारत में व्यापार, राजनीति और कानून के जटिल संबंधों को एक बार फिर उजागर करता है।

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