बेबसी और प्यार, उफनती लहरों के बीच पत्नी को कांधे पर उठाकर अस्पताल पहुंचा पति…
Helplessness and love, the husband carried his wife on his shoulders to the hospital amidst the surging waves...

Breaking Today, Digital Desk : मानसून की भारी बारिश ने देश के कई हिस्सों में कहर बरपा रखा है, जिससे नदियाँ उफान पर हैं और गाँव के गाँव पानी में डूब गए हैं। इसी आपदा के बीच, दिल को छू लेने वाली एक तस्वीर सामने आई है, जो प्यार, दृढ़ संकल्प और व्यवस्था की लाचारी को एक साथ बयां करती है। इस तस्वीर में एक पति अपनी बीमार पत्नी को कंधे पर उठाकर, कमर तक भरे बाढ़ के पानी को चीरता हुआ अस्पताल की ओर बढ़ रहा है।
यह मार्मिक दृश्य रायगढ़ जिले के एक सुदूर गांव का बताया जा रहा है, जहाँ भारी बारिश के कारण सड़कें तालाब बन गई हैं और यातायात का कोई साधन उपलब्ध नहीं है। गाँव का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट चुका है। इसी बीच, एक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। एम्बुलेंस या किसी अन्य वाहन के आने का कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में उसके पति ने जो किया, वह मानवीय भावना की एक मिसाल बन गया।
जब मदद का कोई जरिया नहीं दिखा, तो पति ने एक पल भी नहीं गंवाया। उसने अपनी बीमार पत्नी को अपने कंधों पर बिठाया और लगभग एक किलोमीटर का फासला बाढ़ के खतरनाक पानी में पैदल ही तय करने का फैसला किया। उफनती लहरों और अनजाने खतरों के बीच, वह अपनी पत्नी को सुरक्षित डॉक्टर तक पहुंचाने की धुन में आगे बढ़ता रहा। किसी ने इस घटना की तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर डाल दी, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गई।
यह तस्वीर एक तरफ जहां पति के अपनी पत्नी के प्रति असीम प्रेम और समर्पण को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर यह दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति पर भी एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। सालों से विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन आज भी ऐसे कई गाँव हैं जहाँ एक पक्की सड़क या आपातकालीन स्थिति में एक एम्बुलेंस तक की सुविधा नहीं है।
सोशल मीडिया पर लोग इस पति के जज्बे को सलाम कर रहे हैं, लेकिन साथ ही इस व्यवस्था पर भी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं, जो अपने नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं देने में भी विफल रही है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि आपदा के समय, अक्सर आम इंसान की हिम्मत और एक-दूसरे का सहारा ही सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है।






