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उपराष्ट्रपति चुनाव क्या न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी से बढ़ेंगी एनडीए की मुश्किलें…

Vice Presidential Election Will Justice Sudarshan Reddy's candidature increase NDA's problems

Breaking Today, Digital Desk : उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर बिसात बिछ चुकी है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से महाराष्ट्र के राज्यपाल और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन मैदान में हैं, तो वहीं विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना संयुक्त उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विपक्ष का यह दांव एनडीए के लिए कोई चुनौती पेश कर पाएगा?

एक तरफ जहां सीपी राधाकृष्णन एक अनुभवी राजनेता हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि से आते हैं, वहीं न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड-डी एक कानून के ज्ञाता के तौर पर अपनी पहचान रखते हैं. विपक्ष ने उनकी उम्मीदवारी को “विचारधारा की लड़ाई” करार दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने न्यायमूर्ति रेड्डी को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का एक साहसी हिमायती बताया

कौन हैं सीपी राधाकृष्णन?

सीपी राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुप्पुर में 20 अक्टूबर 1957 को हुआ था. वह महज 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे. उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की है. राधाकृष्णन दो बार कोयंबटूर से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं. उन्हें दक्षिण भारत में बीजेपी के एक बड़े नेता के तौर पर जाना जाता है और वर्तमान में वह महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं.

कौन हैं बी. सुदर्शन रेड्डी?

बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में हुआ था. उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की. वह आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहे और बाद में गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी बने. साल 2007 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जहां से वह 2011 में सेवानिवृत्त हुए. वह गोवा के पहले लोकायुक्त भी रह चुके हैं.

क्या विपक्ष के पास है मौका?

संख्या बल के लिहाज से देखें तो एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है. उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट डालते हैं. संसद के दोनों सदनों में एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसे देखते हुए विपक्ष की राह काफी मुश्किल नजर आती है. हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि विचारधारा की है. विपक्ष का मानना है कि न्यायमूर्ति रेड्डी जैसे कानून के जानकार और निष्पक्ष छवि के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाकर उन्होंने एक मजबूत संदेश दिया है.

यह देखना दिलचस्प होगा कि 9 सितंबर को होने वाले इस चुनाव में क्या कोई उलटफेर होता है, या फिर संख्या बल के आधार पर एनडीए अपनी आसान जीत दर्ज करता है. भले ही परिणाम काफी हद तक स्पष्ट दिख रहा हो, लेकिन इस चुनाव ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष को अपनी-अपनी विचारधारा और राजनीतिक रणनीतियों को देश के सामने रखने का एक और मौका दे दिया है.

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