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मोदी की मिसाल और इंदिरा का जिक्र, अमित शाह ने भ्रष्टाचार विरोधी बिल पर विपक्ष को ऐसे दिया जवाब…

Taking the example of Modi and mentioning Indira, Amit Shah replied to the opposition on the anti-corruption bill in this way

Breaking Today, Digital Desk : संसद के भीतर राजनीतिक माहौल उस वक्त गरमा गया जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तथाकथित ‘दागी’ नेताओं को पद से हटाने से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक का बचाव किया। विपक्ष के तीखे हमलों का सामना करते हुए, शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को नैतिकता का उदाहरण बताया और पलटवार करते हुए कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल की याद दिलाई।

लोकसभा में इस प्रस्तावित कानून पर बहस के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला, जहाँ विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला और एक “सुपर इमरजेंसी” की शुरुआत बताया। इस विधेयक में यह प्रावधान है कि यदि कोई मुख्यमंत्री या मंत्री किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है और 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे अपना पद छोड़ना होगा।

विपक्षी दलों ने इस प्रावधान को तानाशाही पूर्ण और संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए सरकार पर जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष शासित राज्यों को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया। सदन में हंगामे के बीच कुछ विपक्षी सांसदों ने बिल की प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री की ओर फेंक दीं, जिससे तनाव और बढ़ गया।

इन आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने दृढ़ता से विधेयक का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह कानून राजनीति में स्वच्छता और जवाबदेही लाने के लिए आवश्यक है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग आज लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं, उन्हें अपने इतिहास में झांकना चाहिए, और इस संदर्भ में उन्होंने इंदिरा गांधी के दौर का जिक्र किया, जो 1975 में लगाए गए आपातकाल की ओर एक स्पष्ट इशारा था।

शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन पर गलत आरोप लगाए गए थे, तो उन्होंने इस्तीफा देने से पहले जांच का सामना किया था, जो राजनीतिक नैतिकता का एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा किसी को निशाना बनाने की नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति को भ्रष्टाचार और आपराधिक तत्वों से मुक्त करने की है। सरकार का तर्क है कि यह विधेयक सभी पर समान रूप से लागू होगा और इसका उद्देश्य राजनीतिक व्यवस्था में शुचिता स्थापित करना है।

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