
Breaking Today, Digital Desk : असम में चल रहे बेदखली अभियान के बीच योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद की एक टिप्पणी ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि “बांग्लादेशी भी इंसान हैं” और पृथ्वी बहुत बड़ी है, वे यहां रह सकते हैं। इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और इसे वोट बैंक की राजनीति करार दिया है। वहीं, इस विवाद ने असम में दशकों पुराने आप्रवासन के मुद्दे को एक बार फिर से केंद्र में ला दिया है, जहाँ मानवाधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्क आमने-सामने हैं।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब सैयदा हमीदो, सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ असम के उन क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचीं, जहां राज्य सरकार ने कथित तौर पर अवैध अप्रवासियों के खिलाफ बेदखली अभियान चलाया है। दौरे के बाद मीडिया से बात करते हुए हमीद ने कहा, “अगर वे बांग्लादेशी हैं तो इसमें क्या गलत है? वे भी इंसान हैं।” उन्होंने सरकार की कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए कहा कि किसी को भी इस तरह बेदखल करना मुसलमानों पर “कयामत” लाने जैसा है।
हमीद की इस टिप्पणी पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे “असम के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश” करार दिया और कहा कि कोई भी दबाव उन्हें अपनी जमीन और संस्कृति की रक्षा करने से नहीं रोक सकता। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने हमीद के बयान को “मानवता के नाम पर भ्रामक” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर ये कार्यकर्ता चुप क्यों रहते हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि वह वोट बैंक के लिए देश की जनसांख्यिकी को बदलने की कोशिश करने वालों का समर्थन कर रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने सैयदा हमीद के बयान से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि यह पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है और कांग्रेस किसी भी घुसपैठिए को बर्दाश्त नहीं करेगी। हालांकि, इस विवाद ने एक बार फिर से असम में अवैध प्रवासियों के जटिल मुद्दे को उजागर कर दिया है। यह मुद्दा दशकों से राज्य की राजनीति, समाज और सुरक्षा के लिए एक संवेदनशील विषय रहा है। 1985 के असम समझौते के अनुसार, 24 मार्च 1971 के बाद राज्य में प्रवेश करने वाले किसी भी विदेशी को अवैध माना जाएगा।
सरकार का कहना है कि बेदखली अभियान कानून के अनुसार और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है, क्योंकि अवैध अप्रवासियों से देश की आंतरिक सुरक्षा और संसाधनों पर बोझ पड़ता है। वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस अभियान में विशेष रूप से एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और यह मानवीय संकट पैदा कर रहा है। यह घटनाक्रम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर पहले से चले आ रहे तनाव को और बढ़ा सकता है। फिलहाल, सैयदा हमीद की टिप्पणी ने एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें एक तरफ मानवीय आधार पर प्रवासियों के अधिकार हैं तो दूसरी तरफ राष्ट्र की संप्रभुता और जनसांख्यिकीय अखंडता की चिंताएं हैं।






