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गणपति विसर्जन 2025, क्या आपकी मूर्ति पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही…

Ganpati Visarjan 2025, Is your idol harming the environment.

Breaking Today, Digital Desk : गणेश चतुर्थी का त्योहार हम सभी के लिए खुशी और उत्साह लेकर आता है। ढोल-नगाड़े, मोदक की खुशबू और प्यारे गणपति बप्पा का आगमन, ये सब हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। लेकिन इस जश्न के बाद एक सवाल हमेशा सामने आता है – विसर्जन का क्या करें? पारंपरिक तरीके से विसर्जन करने से हमारे पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है? 2025 में, आइए हम सब मिलकर एक ऐसा विसर्जन करें जो हमारी आस्था को भी पूरा करे और हमारी धरती माँ का भी ख्याल रखे।

पारंपरिक विसर्जन और पर्यावरण की चिंताएं

पहले, लोग मिट्टी की मूर्तियों का विसर्जन नदियों और तालाबों में करते थे, जो प्रकृति में आसानी से घुल-मिल जाती थीं। लेकिन अब प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियां आम हो गई हैं। जब हम इन मूर्तियों का विसर्जन पानी में करते हैं, तो ये कई सालों तक गलती नहीं हैं। इससे पानी में रहने वाले जीवों को नुकसान होता है, पानी प्रदूषित होता है और हमारी नदियां व झीलें कचरे के ढेर में बदल जाती हैं। साथ ही, मूर्तियों के साथ चढ़ाए गए फूल, कपड़े और प्लास्टिक की सजावट भी प्रदूषण को और बढ़ा देती है।

2025 में अपनाएं ये पर्यावरण-अनुकूल तरीके

तो क्या इसका मतलब यह है कि हम गणेश जी की पूजा छोड़ दें? बिल्कुल नहीं! हम बस अपने तरीके थोड़े बदल सकते हैं।

मिट्टी की मूर्ति, घर में विसर्जन: सबसे अच्छा तरीका है कि आप शुद्ध मिट्टी से बनी छोटी मूर्ति घर लाएं। पूजा के बाद, इसे एक बड़े गमले या बाल्टी में पानी डालकर विसर्जित करें। कुछ ही घंटों में मूर्ति घुल जाएगी और उस पानी को आप अपने पौधों में डाल सकते हैं। ये न सिर्फ पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि आप अपनी आँखों के सामने गणेश जी को वापस प्रकृति में मिलते देखेंगे।

पौधा गणेश: आजकल कई जगहों पर “पौधा गणेश” की मूर्तियां मिलती हैं। ये मूर्तियां विशेष मिट्टी से बनी होती हैं, जिनके अंदर बीज होते हैं। विसर्जन के बाद, आप इस मूर्ति को गमले में लगा दें और कुछ ही दिनों में उसमें से एक पौधा निकल आएगा। सोचिए, गणेश जी के आशीर्वाद से आपके घर में एक नया जीवन आएगा!

सामुदायिक कृत्रिम तालाब: कई शहरों में प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं कृत्रिम तालाब बनाती हैं। यहां पीओपी मूर्तियों का विसर्जन एक नियंत्रित तरीके से किया जाता है, ताकि नदियों और झीलों को नुकसान न हो। ये एक अच्छा विकल्प है अगर आपने बड़ी मूर्ति स्थापित की है।

प्रतिमा दान या पुनः उपयोग: कुछ लोग अपनी पीओपी मूर्तियों को विसर्जन के बजाय दान कर देते हैं। ये मूर्तियां अगले साल फिर से रंग-रोगन करके इस्तेमाल की जा सकती हैं। हालांकि, यह तरीका पर्यावरण-अनुकूल नहीं है, लेकिन यह कचरा कम करने में मदद करता है।

गणेश विसर्जन 2025: आपकी एक छोटी कोशिश, बड़ा बदलाव

यह सोचना गलत है कि अकेले आपके एक कदम से क्या होगा। जब लाखों लोग मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाते हैं, तो उसका असर बहुत बड़ा होता है। इस गणेश चतुर्थी 2025 पर, आइए हम सब मिलकर एक जिम्मेदार नागरिक बनें और अपनी आस्था को पर्यावरण के साथ जोड़ें। गणेश जी की शिक्षा भी तो यही है – प्रकृति का सम्मान करो!

अगले साल, जब आप गणपति बप्पा को विदा करें, तो इस बात का संतोष होगा कि आपने उन्हें खुशी-खुशी विदा किया और हमारी प्यारी धरती को भी साफ रखा।

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