
Breaking Today, Digital Desk : भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा पर संसद में चर्चा का अवसर राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ गया। जहां एक ओर सरकार ने इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए शुक्ला को सम्मानित करने का इरादा जाहिर किया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर विरोध जताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इस घटनाक्रम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या राष्ट्रीय गौरव से जुड़े विषयों पर राजनीतिक मतभेदों को अलग नहीं रखा जाना चाहिए।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर हाल ही में स्वदेश लौटे हैं। उनकी यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, विशेष रूप से महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। इसी के उपलक्ष्य में, सरकार ने संसद में एक विशेष चर्चा का आयोजन किया था ताकि शुक्ला के असाधारण courage और समर्पण को सराहा जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुक्ला से मुलाकात कर उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए पूरे देश की ओर से गर्व व्यक्त किया।
हालांकि, सदन की तस्वीर उस वक्त बिल्कुल अलग दिखी जब चर्चा शुरू होने पर विपक्षी सांसद अपनी सीटों से नदारद रहे। विपक्ष ने सरकार पर अन्य जरूरी मुद्दों पर बहस से बचने का आरोप लगाते हुए कार्यवाही का बहिष्कार किया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हालांकि बहिष्कार के फैसले के बीच भी एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से शुक्ला की प्रशंसा की और उनकी उड़ान को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक “महत्वपूर्ण मील का पत्थर” बताया।
सरकार ने विपक्ष के इस रवैये की कड़ी आलोचना की है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी दलों से “राजनीति से ऊपर उठकर” इस उपलब्धि को स्वीकार करने का आग्रह किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के इस कदम को “बेहद निराशाजनक” और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि अंतरिक्ष जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों को दलगत राजनीति से परे रखा जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक गुस्सा एक अंतरिक्ष यात्री के प्रति नहीं होना चाहिए, जो किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है और पूरे देश का गौरव है।
यह घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे अक्सर राजनीतिक गतिरोध राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर एकमत होने की भावना पर हावी हो जाते हैं। जहां एक तरफ शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण है, वहीं दूसरी तरफ इस पर संसद में हुई राजनीति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।






