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माँ की मृत्यु का अनसुना किस्सा, पूजा बेदी ने बयां की प्रोतिमा बेदी की अंतिम इच्छा…

The untold story of mother's death, Pooja Bedi narrated Protima Bedi's last wish.

Breaking Today, Digital Desk : अभिनेत्री पूजा बेदी ने अपनी माँ और जानी-मानी मॉडल व नृत्यांगना प्रोतिमा बेदी की मृत्यु को लेकर हाल ही में कुछ भावुक और अनसुने तथ्य साझा किए हैं. उन्होंने बताया कि उनकी माँ की मृत्यु ठीक वैसी ही हुई, जैसी वे हमेशा से चाहती थीं – प्रकृति की गोद में समा जाना. पूजा ने इस बात का भी खुलासा किया कि 1998 में कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा के दौरान हुए एक भूस्खलन में लापता होने के बाद उनकी माँ का पार्थिव शरीर कभी नहीं मिला.

एक हालिया साक्षात्कार में पूजा ने उन पलों को याद किया जब उनकी माँ अपनी अंतिम यात्रा पर निकल रही थीं. उन्होंने बताया, “वो मेरे पास आईं, अपनी वसीयत लिखी, मुझे अपने गहने, सारे दस्तावेज़ और प्रॉपर्टी के कागज़ात सौंप दिए और कहा, ‘कुछ कहा नहीं जा सकता’.” पूजा ने कहा कि उनकी माँ हमेशा से चाहती थीं कि उनका अंत प्रकृति के साथ एक होकर हो, न कि किसी श्मशान घाट में पारंपरिक रस्मों के साथ. वे मानती थीं कि यह उनके शानदार जीवन का एक भव्य समापन होगा.

प्रोतिमा बेदी 1998 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गई थीं, जहाँ पिथौरागढ़ के पास मालपा में हुए एक भयंकर भूस्खलन में वे लापता हो गईं. पूजा ने बताया कि उनकी माँ की मौत ठीक वैसी ही हुई जैसी उन्होंने कल्पना की थी; उनका शरीर कभी नहीं मिला, वह ब्रह्मांड और पृथ्वी के साथ एक हो गईं. पूजा अपनी माँ को एक “अतुल्य ऊर्जा” के रूप में याद करती हैं.

अपने बेटे और पूजा के भाई सिद्धार्थ की आत्महत्या के बाद प्रोतिमा काफी टूट गई थीं और उन्होंने सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लिया था. उन्होंने अपना नाम बदलकर प्रोतिमा गौरी रख लिया था और हिमालय के क्षेत्रों में यात्रा करने लगी थीं. अपनी अंतिम यात्रा से पहले उन्होंने कुल्लू मनाली से पूजा को 12 पन्नों का एक पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने अपने पूरे जीवन का सार बयां किया था. इस पत्र में उन्होंने लिखा था कि वे बेहद खुश और शांति में हैं.

पूजा बेदी का मानना है कि भले ही उन्हें अपनी माँ को पारंपरिक तरीके से विदा करने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्हें इस बात का संतोष है कि उनकी माँ ने अपने जीवन के अंतिम क्षण अपनी शर्तों पर जिए.

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