कांग्रेस दफ्तर में घुसीं भाजपाई महिलाएं, पीएम मोदी पर टिप्पणी को लेकर मचा बवाल…
BJP women entered the Congress office, uproar over comments on PM Modi...

Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई एक अभद्र टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस टिप्पणी से भाजपा की महिला कार्यकर्ताएँ इतनी आक्रोशित हो गईं कि उन्होंने दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। इस घटना ने एक बार फिर राजनीति में भाषा के गिरते स्तर और उसके परिणामों पर बहस छेड़ दी है।
जानकारी के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब पीएम मोदी के खिलाफ एक आपत्तिजनक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस बयान के सामने आते ही भाजपा की महिला विंग की कार्यकर्ताएँ भड़क उठीं। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
गुस्साई महिला कार्यकर्ताएँ, जिनमें से कई वरिष्ठ नेता भी शामिल थीं, हाथों में तख्तियां लिए कांग्रेस कार्यालय जा पहुँचीं। उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तत्काल माफी की माँग की। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों और गमलों को तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ कार्यकर्ताओं को कार्यालय के अंदर घुसकर भी तोड़फोड़ करते देखा गया। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया।
भाजपा महिला मोर्चा की एक नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री पद का अपमान है। हम इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस को अपने नेताओं को संयमित भाषा का इस्तेमाल करने की सलाह देनी चाहिए और इस आपत्तिजनक बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए।”
वहीं, कांग्रेस ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे भाजपा की ‘गुंडागर्दी’ करार दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इस मामले में कानून अपना काम करेगा।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है। ऐसे में नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमले और अभद्र भाषा का प्रयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से लोकतंत्र की गरिमा धूमिल होती है और समाज में कटुता बढ़ती है। सभी राजनीतिक दलों को संयम बरतने और स्वस्थ राजनीतिक बहस को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।






